उत्तराखंड उच्च शिक्षा विभाग में नितांत अस्थायी व्यवस्था के तहत वर्षों से सेवाएँ दे रहे 120 से अधिक प्राध्यापक पिछले आठ महीने से बेरोज़गार हैं।
यूजीसी मानकों के अनुरूप योग्य इन प्राध्यापकों ने 8 से 10 वर्षों तक विभिन्न महाविद्यालयों में निरंतर अध्यापन किया, लेकिन नियमित नियुक्तियों के चलते इनकी सेवाएँ समाप्त हो गईं।
प्रभावित प्राध्यापकों का कहना है कि विभाग और मंत्री ने कई बार समायोजन का आश्वासन दिया, मगर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। जून माह में मंत्री ने स्थानांतरण के बाद समायोजन की बात कही थी, लेकिन अगस्त बीतने के बावजूद न तो स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी हुई है और न ही पद सृजन का कार्य आगे बढ़ा है।
लंबे समय तक सेवा देने के बाद बेरोज़गार हो चुके इन उम्रदराज प्राध्यापकों के सामने अब आर्थिक संकट गहरा गया है। उनका कहना है कि अपने ही राज्य में वे उपेक्षित और अपमानित महसूस कर रहे हैं।
प्राध्यापकों ने सरकार और उच्च शिक्षा मंत्री से शीघ्र समायोजन की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।


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