संजीव शर्मा,नवल टाइम्स न्यूज़, हरिद्वार: राज्य के केदारनाथ धाम में 16 जून 2013 के दिन कुदरत ने जमकर तांडव मचाया था, जिस मंजर को याद करते हुए आज भी रूह काँप उठती है।

केदारनाथ क्षेत्र में आई इस जलप्रलय ने हजारों लोगों की जिंदगी को निगल लिया। वहीं इतने सालो बाद भी केदारपुरी क्षेत्र में पुनर्निर्माण के मरहम से भी आपदा के जख्म पूरे नहीं भर पाए हैं। हालाँकि राज्य सरकार की तरफ़ से आपदा में तबाह हुई केदारपुरी को संवारने की कोशिशें लगातार जारी हैं।

केदारबाबा के भक्त देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिलचस्पी के चलते केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण के कार्यों ने रफ्तार पकड़ी हुई है। धाम क्षेत्र में पहले चरण के निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं और दूसरे चरण के कार्यों पर काम शुरू हो गया है।

केदारपुरी में अब काफी कुछ बदल गया है। साल 16 जून 2013 की आपदा में तबाह हुए केदारनाथ धाम की तस्वीर और पुनर्निर्माण के बाद आज के केदारनाथ धाम में जमीन-आसमान का अंतर है। धाम में सभी तरह के निर्माण कार्य श्री केदारनाथ उत्थान चैरिटी ट्रस्ट के माध्यम से हो रहे हैं। कुल मिलाकर केदारपुरी में पुनर्निर्माण के मरहम से आपदा के जख्मों को मिटाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।

बड़ी बात यह है कि धाम में तो निर्माण कार्यों में तेज़ी नज़र आ रही है। लेकिन 2013 आपदा की शिकार केदारघाटी में राहत और पुनर्निर्माण कार्यों की रफ्तार में वैसी तेजी नज़र नहीं आ रही। दिलो में बैठे जलप्रलय के डर ने केदारघाटी के कई परिवारों को मैदानों इलाक़ों में पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया है   ।

जो लोग आज भी यहाँ पर निवास कर रहे है। उनके मन में आपदा के जख्म अब भी हरे हैं। आज भी जब आसमान से बादल बरसते हैं तो खौफनाक यादों के रूप में त्रासदी के जख्म हरे हो जाते हैं।

और जो लोग बाहर के क्षेत्रों के हैं जिन्होंने अपनों को इस त्रासदी में खोया है उनके तो इस आपदा को नाम से ही त्रासदी को याद कर जख्म हरे हो जाते हैं । क्या पता कब तक भर पायेंगे ये जख्म।