- राजस्थान कांग्रेस पहले अपनी गिरेवान में झाँक ले, उन्हें नाकाबिल होने से ही जनता ने कुर्सी से उतारा है” – अरविन्द सिसोदिया
कोटा, 27 फरवरी। राजस्थान विधानसभा और उसके बाहर कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए जा रहे बेबुनियाद आरोपों और अङ्गेबाजी पर कड़ा प्रहार करते हुए भाजपा मीडिया विभाग राजस्थान के कोटा संभाग संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि “कांग्रेस को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपनी गिरेवान में झाँक लेना चाहिए। राजस्थान की जनता ने 2023 में कांग्रेस सरकार को उसकी नाकाबिलियत, आंतरिक कलह, आर्थिक कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण ही राजस्थान सरकार की कुर्सी से उतारकर विपक्ष में बैठाया है।
सिसोदिया नें कहा कि ” अभद्रता और आराजकता कांग्रेस की संस्कृति बन चुका है, जिसकी नकल अब कांग्रेस में व्यापकरूप से देखने को मिल फिर है। राजस्थान की जनता में कांग्रेस के गिरे हुये व्यवहार को पशंद नहीं करती और कांग्रेस के प्रति आमजन में गुस्सा और नाराजगी है।
सिसोदिया ने कहा कि “कांग्रेस की तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं में लगातार प्रश्नपत्र लीक हुए, जिससे लाखों युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर कांग्रेस सरकार ने उनके अवसरों को अंधकारमय किया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार में रीट सहित अनेक परीक्षाओं में अनियमितताओं ने कांग्रेस की विश्वसनीयता को पूरी तरह समाप्त कर दिया। राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य की गिरफ्तारी जैसी शर्मनाक घटनाएँ बताती हैं कि कांग्रेस ने परीक्षा तंत्र को किस स्तर तक प्रभावित किया था।
सिसोदिया ने कहा कि “तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के रिश्तेदारों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा परीक्षा इंटरव्यू में मिले 80, 80 और 80 अंक आज भी राजस्थान के युवाओं के बीच मुख्य चर्चा का विषय हैं, जिनका कांग्रेस कभी जवाब नहीं दे पाई।
सिसोदिया ने “गहलोत के भ्रष्टाचार की लाल किताब” और बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा द्वारा उठाए गए “लाल डायरी” प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि “कांग्रेस अपने ऊपर लगे गंभीरतम आरोपों का जवाब नहीं दे पा रही और झूठे सवाल और हँगामें राजस्थान विधानसभा में खड़े किए जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि “कांग्रेस की गहलोत सरकार अपने ही विधायकों की बगावत और अविश्वास से इतनी डरी हुई थी कि पाँच सितारा होटलों में विधायकों की बाड़ाबंदी कर सरकार चलाई जा रही थी, जबकि प्रदेश के युवा सड़कों पर अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे थे और जनता अव्यवस्था से कराह रही थी। वहीं भाजपा की भजनलाल शर्मा सरकार बिंदास चल रही है।
उन्होंने कहा कि “राजस्थान की जनता ने सत्ता और संगठन के संघर्ष को,कांग्रेस विधायकों को सामूहिक रूप से विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे सौंपते भी देखा है और सत्ता बचाने के लिए बहिष्कार तथा बंद कमरों की राजनीति भी देखी है। वहीं तत्कालीन गहलोत सरकार में ही तत्कालीन उपमुख्यमंत्री को लेकर स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा ‘गद्दार’, ‘नकारा’ और ‘निकम्मा’ जैसे शब्दों का प्रयोग कर, कांग्रेस की बदतमीजी की संस्कृति को ही उजागर करता है।
सिसोदिया ने आगे कहा कि “कांग्रेस को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि बिजली दर नहीं बढ़ाने के वायदे से वोट लेकर उनके शासन में लगातार बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई, बार-बार ईंधन अधिभार लगाए गए और प्रतिपूरक शुल्क भुगतान जैसे निर्णयों से आम उपभोक्ता पर भारी आर्थिक बोझ डाला गया। वहीं विद्युत वितरण कंपनियों के घाटे और वित्तीय कुप्रबंधन ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गर्त में डुबोने का काम तत्कालीन मुख्यमंत्री गहलोत ने ही किया।
उन्होंने कहा कि “गहलोत सरकार में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी अत्यंत गंभीर चिंता का विषय रही। राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के आंकड़ों के कारण राजस्थान को शर्मिंदा होना पड़ता था। वहीं गहलोत सरकार में सांप्रदायिक घटनाओं और महिला अपराधों ने राजस्थान को शर्मिंदा किया।
अरविन्द सिसोदिया ने कहा कि “कांग्रेस को दूसरों को ज्ञान देने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए। उनकी सरकार का चाल, चरित्र और चेहरा जनता भलीभांति जानती है। प्रदेश की जनता ने उनके कुशासन, घोटालों और आंतरिक खींचतान का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देकर ही सत्ता की गद्दी से उतारा है।


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