दिनेश नवानी की कविता “कभी सोचा नहीं था”

कभी सोचा नहीं था,

ऐसे भी दिन आएंगे।

छुट्टियां तो होंगी पर,

मना नहीं पाएंगे।

आइसक्रीम का मौसम होगा,

पर खा नहीं पाएंगे।

रास्ते खुले होंगे पर,

कहीं जा नहीं पाएंगे।

जो दूर रह गए उन्हें,

बुला भी नहीं पाएंगे।

और जो पास हैं उनसे,

हाथ मिला नहीं पाएंगे।

जो घर लौटने की राह देखते थे,

वो घर में ही बंद हो जाएंगे।

साफ हो जाएगी हवा पर,

चैन की सांस ना ले पाएंगे।

नहीं दिखेगी कोई मुस्कुराहट,

चेहरे मास्क से ढक जाएंगे।

खुद को समझते थे बादशाह,

वो मदद को हाथ फैलाएंगे।

क्या सोचा था कभी,

ऐसे दिन भी आएंगे।

दिनेश नवानी की कविता “कभी सोचा नहीं था” दिनेश नवानी आप  ए पी एस स्कूल देहरादून में पीजीटी टीचर है।