ग़ज़ल: कभी गुज़रो हमारी रहगुज़र से

कभी गुज़रो हमारी रहगुज़र से
नहीं तो जाएंगे हम अपने सर से

ख़ुदा को भूल बैठे कोई इन्सां
मोहब्बत ऐसी भी क्या माल ज़र से

ख़ुशी की छाँव में तस्कीं मुझे थी
चले आए जाने ग़म किधर से

पढ़ें हम किसलिए ख़ुद को बताओ
अभी फ़ुर्सत कहाँ मीर ज़फ़र से

क़माई हक़ की खाई हमने यारो
पसीने में हमेशा आए तर से

बलजीत सिंह बेनाम

संक्षिप्त परिचयः

बलजीत सिंह बेनाम
शिक्षा:स्नातक
संगीत अध्यापक
उपलब्धियां:विविध मुशायरों व सभा संगोष्ठियों में काव्य पाठ
विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित
विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित