August 8, 2026

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राजकीय कन्या महाविद्यालय रामपुरा,कोटा में हुआ ‘गुरु वंदन’ कार्यक्रम का आयोजन

देवेंद्र सक्सेना, कोटा, 8 अगस्त। राजकीय कन्या महाविद्यालय रामपुरा कोटा में शनिवार को अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के तत्वावधान में ‘गुरु वंदन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की भारतीय संस्कृति में महत्ता, विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण तथा राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं एवं संकाय सदस्यों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. गीताराम शर्मा ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। गुरु केवल ज्ञान प्रदान करने वाला नहीं, बल्कि विद्यार्थी के व्यक्तित्व, चरित्र एवं जीवन-दृष्टि का निर्माण करने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व को समझने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता डॉ. पुरनचंद उपाध्याय ने गुरु-शिष्य परंपरा के सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री अथवा रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, जिम्मेदार और संस्कारवान नागरिक का निर्माण करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जीवन मूल्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. सुबोध कुमार ने की। अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों एवं नैतिक संस्कारों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। गुरु वंदन जैसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने तथा गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम का संचालन अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के जिला सचिव कोटा डॉ. संतोष कुमार मीणा ने किया। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों का प्रभावी संचालन करते हुए गुरु-शिष्य संबंध की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बीनू कुमावत ने किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय की डॉ. कविता मकवाना, डॉ. अंजू कविया, डॉ. पुखराज सेन, विद्या संबल योजना के संकाय सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का समापन गुरु के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र सेवा के मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने के संकल्प के साथ हुआ।

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