May 10, 2026

Naval Times News

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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता में बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर कार्यशाला का आयोजन

  • महाविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित है: प्रो अग्रवाल
  • ज्ञान एवं नवाचार अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ: प्रो पुरोहित
  • आज युद्ध जमीनी में स्तर पर नहीं बल्कि विचारों के स्तर पर लड़ा जा रहा है: डॉ चौहान
  • आईपीआर नवाचार को संरक्षण प्रदान करता है: प्रो तोमर

देहरादून: राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता, देहरादून के आईपीआर प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित बौद्धिक संपदा अधिकार एवं आर्थिक विकास विषय पर आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो विनोद प्रकाश अग्रवाल ने कहा कि महाविद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है।

युवाओं की सृजन शक्ति और नवाचार के विकास की दृष्टि से बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर यह कार्यशाला उनका का मार्गदर्शन करेगी जिससे आने वाले समय में वे अपनी सृजन शक्ति को उद्यमिता के रूप में स्थापित करने में सफल होंगे।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए दून विश्वविद्यालय स्कूल आफ मैनेजमेंट के डीन एवं सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज के समन्वयक प्रो एच सी पुरोहित ने कहा कि नवाचार उद्यमिता विकास के लिए महत्वपूर्ण गुण है और विद्यार्थी की सृजन शक्ति एवं नवाचार के विकास में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

उन्होंने कहा कि आज के विज्ञान व तकनीकी युग में विद्यार्थियों को ज्ञान और नवाचार की दिशा में अग्रसर होना होगा और इसमें शिक्षक उनके ज्ञान का परिमार्जन करने के साथ ही नवाचार जैसे गुणों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

प्रो पुरोहित ने वैश्विक स्तर पर बौद्धिक संपदा संगठन डब्ल्यूआईपीओ, विश्व व्यापार संगठन, टीआरआईपीएस के विभिन्न प्रावधानों के साथ-साथ पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, भौगोलिक संकेत, ट्रेड सीक्रेट, औद्योगिक डिजाइन आदि विषयों पर विस्तारपूर्वक उदाहरण के साथ प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच और सृजन शक्ति देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रो पुरोहित ने थॉमस एडिसन, आइंस्टीन, ग्राहम बेल जैसे वैज्ञानिकों के उद्यमिता विकास और समाज उपयोगी अविष्कारों का अर्थव्यवस्था के विकास में भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी देश के विकास में उद्यमिता और वैज्ञानिक शोध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसलिए यह कार्यशाला विद्यार्थियों को सृजन शक्ति विकसित करने के साथ उद्यमिता विकास की दिशा में प्रेरक का कार्य करेगी।

इस अवसर पर यूनिवर्सिटी का पेट्रोलियम एवं एनर्जी स्टडीज देहरादून के असिस्टेंट डीन डॉ हिमांशु चौहान ने बौद्धिक संपदा अधिकारों पर वैश्विक स्तर पर कई रोचक प्रसंग का उदाहरण देते हुए बौद्धिक संविदा के विषयों और कानूनी दाँव पेंचों का उदाहरण देते हुए रिलायंस जिओ आईफोन और सैमसंग विवाद, कैडबरी और नेस्ले के बीच चॉकलेट का विवाद के साथ ही संगीत जैसे कई विषयों मैं बौद्धिक संपदा से जुड़े विवादों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि आज का युद्ध भौगोलिक स्तर से ज्यादा दिमागी स्तर पर और विचारों के स्तर पर लड़ा जा रहा है और इसलिए हमें युवाओं की विचार शक्ति को विकसित करना होगा। और इसके लिए इस प्रकार की कार्यशालाओं एवं संगोष्ठियों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ऋषिकेश परिसर की वरिष्ठ प्रोफेसर अनीता तोमर ने उत्तराखंड के 27 भौगोलिक संकेत और हिमालय विरासत के संरक्षण और संवर्धन को बौद्धिक संपदा से जोड़ते हुए भारत के अब तक के आविष्कारों के माध्यम से बौद्धिक संपदा नवाचार और वैज्ञानिक शोध के विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रो तोमर ने कहा कि यह कार्यशाला युवाओं को स्वरोजगार सृजन करने के साथ ही निवेश, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिभा को प्रदर्शित करने में सहायक सिद्ध होगी।

उन्होंने कहा कि आई पी आर नवाचार की रक्षा करता है इसलिए इसका ज्ञान हर विद्यार्थी को अध्ययन के दौरान होना आवश्यक है।

कार्यशाला में वरिष्ठ प्रोफेसर यतीश वशिष्ठ, प्रो नौटियाल, महाविद्यालय आईपीआर प्रकोष्ठ की सयोजक डॉ, कविता काला, प्रो ऍम एस पावर, डॉ सुमन सिंह गोसाई, डॉ डिंपल भट्ट, डॉ अनीता चौहान, डॉ उमा पनोई, डॉ विनोद शाह,डॉ रामचंद्र नेगी, डॉ लीना रावत, प्रो ज्योति खरे, डॉ डीके राठौर डॉ आशुतोष मिश्रा डॉ शैलेंद्र सिंह सहित समस्त विद्यार्थी एवं प्राध्यापक गण उपस्थित थे।

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