हर तस्वीर कुछ कहती है

हर तस्वीर कुछ कहती है
हर तस्वीर के पीछे एक कहानी ,एक याद है, वह बताती रहती है
हर तस्वीर कुछ कहती है
जिन्दगी की दौड़ में छूट गए जो लम्हात,
वह उन्हें फिर से दोहराती रहती है
हर तस्वीर कुछ कहती है।
गोद में आई एक नन्ही परीजो हंस-हंस खिलखिलाती थी
उसी हंसी मुस्कान से मेरे मन को, फिर से गुदगुदाती रहती है
हर तस्वीर कुछ कहती है।
बेटी की रुखसती का वक्त आंखों से छलका पानी,
फिर से सीने में उसी दर्द को बढाती रहती है
हर तस्वीर कुछ कहती है।
पहले क्या थे अब क्या हो गए हम
उम्र के लम्बे सफर का फासला हमसे यह बताती रहती है
हर तस्वीर कुछ कहती है।
जिन्दगी के सफर में कुछ फूल मिले तो कहीं कांटे चुभे,
कुछ दर्द के अहसास को हर पल सहलाती रहती है
हर तस्वीर कुछ कहती है।

कविता की रचयिता सुनीति त्यागी हैं जो असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।