सुनीति त्यागी की कविता: नवजीवन का निर्माण करो

उठो जवानों, आगे आओ, नवजीवन का निर्माण करो।

सहयोग, प्रेम व भाईचारे से, भारत का कल्याण करो।

सोए हुए हैं जो अब तक, उनको तुम्हें जगाना है,

बिखरे हैं माला के मोती, उनको तुम्हें मिलाना है।

सूत्र एकता का अपनाकर नर जाति का उत्थान करो,

सहयोग, प्रेम व भाईचारे से भारत का कल्याण करो।।

ईर्ष्या, द्वेष ना रहे कहीं पर, ऐसा समाज बनाना है,

निगल रहा है जो समाज को वह भ्रष्टाचार मिटाना है।

मानव को सच्ची राह दिखाकर अपना नाम महान करो

सहयोग, प्रेम व भाईचारे से भारत का कल्याण करो।।

जाति के गौरव हो , ऋषियों की संतान की संतान हो तुम

सत्य अहिंसा के भारत में ईश्वर का वरदान हो तुम।

परहित, पर-सेवा के लिए निजी स्वार्थ का बलिदान करो

सहयोग प्रेम व भाईचारे से भारत का कल्याण करो।।

उठो जवानों, आगे आओ, नवजीवन का निर्माण करो।

उठो जवानों, आगे आओ, नवजीवन का निर्माण करो।

सुनीति त्यागी,शिवालिक नगर , हरिद्वार

आप हरिद्वार कनखल एच ई सी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर है। आपकी रुचि लेखन कार्य में है आपको संगीत तथा कविताएं लिखना पसंद है।