14 नवंबर 2025: राजकीय महाविद्यालय, चकराता (देहरादून) के गणित विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) तथा श्रीदेवसुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ऋषिकेश परिसर के गणित विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ई-सम्मेलन “Recent Developments in Pure and Applied Mathematics (RDPAM–2025)” का समापन अत्यंत गरिमामय और विद्वत्तापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
यह प्रतिष्ठित सम्मेलन उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
समापन सत्र (वैलेडिक्टरी सेशन) के मुख्य अतिथि, उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक एवं सम्मेलन के संरक्षक प्रो. विश्वनाथ खली ने अपने प्रेरक उद्बोधन में गणित के बढ़ते महत्व पर बल दिया।
उन्होंने कहा, “हाल के वर्षों में गणित का दायरा निरंतर बढ़ा है, और आज यह डिजिटल गवर्नेंस से लेकर सतत विकास तक, सभी क्षेत्रों का आधार बन चुका है।” प्रो. खली ने अपने प्रेरक एवं ज्ञानवर्धक विचार व्यक्त करते हुए बताया कि गणित केवल संख्याओं का खेल नहीं, बल्कि तर्क, अनुशासन और नवाचार की आधारशिला है, जिसने मानव सभ्यता को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उच्चतम आयामों तक पहुँचाया है।
उन्होंने इस आयोजन को व्यापक शैक्षणिक गुणवत्ता के विकास की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन न केवल शोध संस्कृति को समृद्ध करते हैं, बल्कि नवाचार और वैश्विक सहयोग की भावना को भी बढ़ाते हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि, “गणित अब केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि नीति-निर्माण, प्रौद्योगिकी और वैश्विक चुनौतियों के समाधान का प्रमुख साधन बन चुका है।” इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संवाद हमारे शिक्षण-अनुसंधान को नई ऊर्जा देते हैं।”
समापन सत्र का शुभारंभ सम्मेलन की संयोजक प्रो. अनीता तोमर (विभागाध्यक्ष, गणित, पी.टी.एल.एम.एस. परिसर, ऋषिकेश) के स्वागत भाषण और सम्मेलन के संक्षिप्त प्रतिवेदन से हुआ। प्रो. तोमर ने अपने विस्तृत संबोधन में मुख्य अतिथियों, विशिष्ट अतिथियों, आमंत्रित वक्ताओं, सत्राध्यक्षों, शोधार्थियों और देश–विदेश से जुड़े प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत करते हुए बताया कि इस ई-सम्मेलन का उद्देश्य गणित के शुद्ध एवं अनुप्रयुक्त दोनों क्षेत्रों में हो रहे नवीनतम शोध-विकास पर विचार-विमर्श हेतु एक वैश्विक मंच प्रदान करना था।
दो दिनों में आयोजित तकनीकी सत्रों ने देश-विदेश के प्रतिभागियों को Fixed Point Theory, Differential Equations, Dynamical Systems, Computational Techniques, Fractals, Nonlinear Analysis, Data Science, AI, Machine Learning और Mathematical Modelling जैसे समकालीन शोध क्षेत्रों में नवीन प्रवृत्तियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन शोधार्थियों के लिए न केवल ज्ञान–विस्तार का अवसर रहा बल्कि भविष्य में सहयोगात्मक शोध की संभावनाओं को भी सुदृढ़ करता है।
उन्होंने कहा कि कि गणित आधुनिक तकनीकी युग की रीढ़ है और इस सम्मेलन ने गणित के विभिन्न अनुप्रयुक्त क्षेत्रों पर संवाद स्थापित कर युवाओं को बहुआयामी शोध दृष्टि प्रदान की है। प्रो. तोमर ने कहा, “दो दिनों में आयोजित 100 से अधिक शोध–प्रस्तुतियों और 12 मुख्य तकनीकी सत्रों में भारत, तुर्की, सऊदी अरब, ओमान, अल्जीरिया और दक्षिण अफ्रीका से आए प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी ने इस सम्मेलन को वास्तव में वैश्विक गणित समुदाय को जोड़ने वाला मंच बनाया।
हमारा उद्देश्य सैद्धांतिक गणित और वास्तविक समस्याओं के बीच की दूरी को कम करना था, और यह सम्मेलन उस दिशा में अत्यंत सफल रहा।” उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन ने शुद्ध एवं अनुप्रयुक्त गणित, कम्प्यूटेशनल विज्ञान और अंतःविषय शोध में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह आयोजन युवा शोधकर्ताओं और वरिष्ठ वैज्ञानिकों के बीच सार्थक संवाद का सशक्त मंच साबित हुआ। प्रो. तोमर ने पूरे सम्मेलन की मुख्य उपलब्धियों का संक्षिप्त और सुव्यवस्थित विवरण भी प्रस्तुत किया।
नार्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी, शिलांग के प्रोफेसर संतोष कुमार ने कहा कि RDPAM–2025 जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक साख को वैश्विक पटल पर नई पहचान देते हैं। उन्होंने कहा कि गणित केवल विज्ञान की भाषा नहीं, बल्कि यह सृजनशीलता, नवाचार और मानव चिंतन की एक अनिवार्य प्रवृत्ति है, जो वास्तविक जीवन की समस्याओं, पर्यावरणीय मॉडलिंग, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण और इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों में प्रभावी समाधान प्रदान करता है। उन्होंने सम्मेलन की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध स्तर की सराहना करते हुए कहा—“यह सम्मेलन गणितीय चिंतन और अनुप्रयुक्त अनुसंधान को नई दिशा देने वाला सिद्ध हुआ है।”
दूसरे दिन का संपूर्ण कार्यक्रम उच्च स्तरीय शैक्षणिक चर्चाओं और शोध विचार-विमर्श से परिपूर्ण रहा। प्रोफेसर यू. सी. गैरोला (एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय): डॉ. आशीष कुमार (ICFAI University, देहरादून): डॉ. मनीष जैन (अहीर कॉलेज, रेवाड़ी) , प्रोफेसर राजेन्द्र कुमार(ओमान ) ने विषय को सहजता से समझाया। प्रोफेसर ए. एच. अंसारी (दक्षिण अफ्रीका) ने F–contractions में उभरते नए शोध प्रश्नों पर प्रकाश डाला। इन सत्रों में Dickson codes, fractal visualization , चुम्बकीय क्षेत्र में तरल प्रवाह, वेवलेट अनुप्रयोग, भू–चुंबकीय तूफानों की गणितीय मॉडलिंग, पेरिस्टाल्टिक तरंगों से प्रवाह की गति, और वैदिक खगोल विज्ञान की अवधारणाओं जैसे विविध और महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किए गए। सत्रों की अध्यक्षता प्रोफेसर यमनाम रोहेन, प्रोफेसर जी. वी. आर. बाबू, प्रोफेसर एस. ए. कात्रे, प्रोफेसर राजेश शर्मा और प्रोफेसर राजिंदर शर्मा जैसे वरिष्ठ विद्वानों ने की।
दिन के अंत में आयोजित समापन सत्र का कुशल मंच संचालन डॉ. अभय शिखर पंवार ने किया। स्थानीय आयोजन सचिव डॉ. सुधीप्त कंदारी ने औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव देते हुए सभी माननीय अतिथियों, वक्ताओं, तकनीकी टीम, और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन सभी के सामूहिक प्रयास और समर्पण का साकार रूप है, और भविष्य में भी ऐसे शोध-आधारित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन निरंतर आयोजित होते रहेंगे।
श्रीदेवसुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एन. के. जोशी ने भी सभी शोधार्थियों को उनके योगदान के लिए बधाई दी और भविष्य में ऐसे वैज्ञानिक आयोजनों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। Ex-Dean प्रोफेसर कंचन लता सिन्हा की सम्मानित उपस्थिति ने भी सत्र को विशेष महत्त्व प्रदान किया।
डॉ. शिवांगी उपाध्याय, डॉ. नवीन चंद्र, डॉ. मनीषा पंत, डॉ. विनोद चंद्र, डॉ. विपुल कुमार, सुश्री रश्मि रॉय, सुश्री शिवानी नेगी तथा अन्य प्राध्यापकों की सक्रिय भागीदारी ने इस सम्मेलन की सफलता सुनिश्चित की।
विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि RDPAM–2025 अपने व्यापक शोध विषयों और उच्च स्तर की चर्चाओं के माध्यम से गणित के शुद्ध और अनुप्रयुक्त दोनों क्षेत्रों में नए शोध आयाम खोले हैं, जो भविष्य के नवाचार, अनुसंधान विस्तार और अंतरविषयक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।


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