April 8, 2026

Naval Times News

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कोटा में मातृशक्ति सम्मेलन सम्पन्न, सनातन संस्कृति संरक्षण और राष्ट्र चेतना का आव्हान 

  • हिंदू परिवार परंपरा सभी को सुख और शांति प्रदान करती है – प्रो. भगवती प्रसाद

कोटा, 08 अप्रैल : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कोटा महानगर की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होनें के अवसर पर शताब्दी वर्ष के क्रम में ” मातृशक्ति प्रमुख जन गोष्ठी ” का आयोजन बुधवार अपराहन में तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेदिक योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय में रखा गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पेसिफिक यूनिवर्सिटी उदयपुर के कुलगुरु एवं अखिल भारतीय स्वदेशी जागरण संयोजक आदरणीय भगवती प्रसाद जी रहे , गोष्ठी की अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय, कोटा कुलगुरु श्रीमती विमला ने की साथ ही मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोटा महानगर के संघ चालक गोपाल लाल गर्ग भी उपस्थित रहे।

कृषि विश्वविद्यालय, कोटा कुलगुरु श्रीमती विमला ने राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन से नेतृत्व , रानी लक्ष्मी बाई से व्यक्तित्व की प्रेरणा लेने बताया, जिस प्रकार जीजा बाई ने शिवाजी को तैयार उसी प्रकार माताओं को बालको को मोबाइल से दूर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

मुख्य वक्ता पेसिफिक यूनिवर्सिटी कुलगुरु भगवती प्रसाद ने बताया की जीजाबाई ने अपने शिवाजी का निर्माण कर पेशवा काल में भगवा की स्थापना की रानी अहिल्या बाई ने अपने राज कौशल से सेनापति के माध्यम महिला नेतृत्व किया।

दसरथ के द्वारा दिए गए वचनों की रक्षा के लिए कौशल्या ने राम को वन जाने के लिए कहा, राम को श्रीराम बनने की प्रेरणा देने वाली भी माँ रही।

ऋग्वेद काल में विषफला के पति के पैर युद्ध में कट जाने पर अयस्क के पैर लगाये यह बताया है की उस समय की मातुशक्ति कितनी विदुषी थी।

परिवार प्रथा भारत की सांस्कृतिक धरोहर है परिवार में पति पत्नी सम्बन्ध विश्वास के जन्म जन्मान्तरों का अटूट बंधन का पर्याय है | तलाक जैसा शब्द हिन्दू धर्म ग्रंथो का नहीं है यह वर्ष 2000 के बाद लोगों की जानकारी में आया। विवाह विच्छेद की घटनाये विचलित करने वाली है यह भारत की परम्परा नहीं है । टीवी सीरियल में नकारात्मक संवाद परोसे जा रहे है।

परिवारिक घटनाओं के माध्यम से अलगाव पैदा किया जा रहा है ।आर्थिक फायदों के लिए मिडिया कम्पनियां एकल परिवार को बढावा दी रही है | परिवार समाज व राष्ट्र की इकाई है यह सहयोग एवं सरोकार करने वाला होना चाहिए |नकारात्मक नहीं।

स्व के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा की हमें हमारे देश में बनी हुई वस्तुओं का बहुतायत में उपयोग करना चाहिए | MADE IN INDIA होगा तभी MAKE IN INDIA साकार हो सकेगा | आज जापान अपने देश में बनी वस्तुओं का इस्तेमाल करता है इसी के कारण विश्व में MADE IN JAPAN की पहचान विश्वास का प्रतीक है।

मातुशक्ति अपने बच्चों को कर्तव्यनिष्ठ बनाये नागरिक कर्तव्यों को बताए अधिकार से पहले कर्तव्य की सिख माता ही दे सकती है।

स्व भाषा के विषय में अपने विचार देते हुए बताया की हमें हमारी मातृभाषा में ही करना चाहिए देवनारी लिपि पल्लव लिपि में पत्र लिखना ताकि भाषा का संरक्षण हो सके।

मातुशक्ति को प्राचीन वांग्मय को युवा पीढ़ी तक ले जाना है | पढ़ाना एवं पढ़ाने के लिए प्रेरित करना। भजन , संस्कार , भाषा ,भूषण के बारे में बताकर संस्कार व संस्कृति का संरक्षण करना मातुशक्ति की जिम्मेदारी है।

1982 की जनगणना में हिन्दू बहुमत में थे किन्तु आज की बात में हिन्दू संख्या में घटते जा रहे है इस पर विचार करने की आवश्यकता है।

पर्यावरण संरक्षण पौधारोपण बिजली खपत में प्रतिस्पर्धा की बजाये पारस्परिक सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता है।

मातृशक्ति का आवाहन करते हुए कहा की महिलाशक्ति बैठक करें विमर्श पर चर्चा करें ,न्यूज़ लिखे, ब्लॉग बनाये, रील्स के माध्यम से परिवार प्रथा को मजबूत बनाने में अपना योगदान करें | पूजा पाठ के माध्यम से परिवार में संस्कार प्रदान करें | युवाओं व बाल मन संस्कार जगाने में योगदान करें।

परिवार को संस्कारवान करना मातृशक्ति की जिम्मेदारी है तो उनका सम्मान होना ही चाहिए।

भारत में 87000 हजार शाखाओं के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्र चेतना में योगदान दे रहा है वही मातृशक्ति की राष्ट्र सेविका समिति मातुशक्ति का संगटन में योगदान दे रही है।

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