February 18, 2026

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कोटा: राजकीय कला कन्या महाविद्यालय में ‘दस दिवसीय संस्कृत संभाषण कार्यशाला एवं शिविरम्‘ का समापन

देवेंद्र सक्सेना, कोटा: राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, कोटा में कल दिनांक 16.02.2026 को ‘दस दिवसीय संस्कृत संभाषण कार्यशाला एवं शिविरम्‘ का समापन समारोह संस्कृत भारती, कोटा महानगर एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डाॅ. सीमा चैहान ने की, जिसमें मुख्य अतिथि डाॅ. विजय कुमार पंचोली, सहायक निदेशक, काॅलेज शिक्षा, परिक्षेत्र कोटा व सारस्वत् अतिथि डाॅ. गीताराम शर्मा, पूर्व सहायक निदेशक रहे एवं भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रभारी श्रीमती पे्ररणा शर्मा, वरिष्ठ संकाय सदस्य डाॅ. राजेन्द्र माहेश्वरी एवं श्री ललित नामा, सहायक आचार्य, संस्कृत, कनवास विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री कमल शर्मा, (क्षेत्र संगठन मंत्री, संस्कृत भारती, राजस्थान) रहे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री कमल शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष संस्कृत भारती ने अपने सम्बोधन में कहा कि संस्कृत भारती 1981 से समस्त भारत व विश्वभर में संस्कृत भाषा के महत्व के प्रचार-प्रसार में संलग्न हैं।

‘ज्ञानम् परमम् ध्येयम्’ के मूल उद्देश्य को सार्थक करने वाली संस्कृत भाषा को पाश्चात्य प्रभाव के कारण अनेक विमर्श का सामना करना पड़ा, लेकिन संस्कृत केवल एक विषय और भाषा नहीं, एक राष्ट्र निर्माण की विद्या है। ‘आधुनिक बनो और संस्कृत सीखो’ का आह्वान करते हुए उन्होंने बताया कि- संस्कृत भाषा मनुष्य को यह सिखाती है कि जीवन अमृत केवल मेरे लिए नहीं दूसरों के लिए भी है और इसी सूत्र को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने तीन मंत्र छात्राओं को दिये।

उन्होंने कहा कि प्रतिदिन सभी को दो बातें संस्कृत में बोलना, लिखना और मोबाइल का उपयोग संस्कृत भाषा को सीखने में करना चाहिए। उन्होंने यह जानकारी दी कि संस्कृत प्रमोशन फाउण्डेशन एवं राष्ट्रीय संस्कृत संस्थानम् से आॅनलाईन भी संस्कृत भाषा को सीखा जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि डाॅ. गीताराम शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत भाषा मृत भाषा नहीं है अपितु आत्मबोध कराने वाली भाषा है। यदि भारत के वैभव को पुनः स्थापित करना है तो संस्कृत भाषा का शिक्षण-प्रशिक्षण आवश्यक है। जीवन मूल्यों की शिक्षा एवं मनोबल को जगाने का कार्य संस्कृत भाषा से बेहतर कोई नहीं कर सकता एवं तकनीकी युग में प्प्ज् संस्थानों ने भी संस्कृत ज्ञान केन्द्र स्थापित कर दिये हैं और आज संस्कृत रोजगारपरक भाषा बन गई है। संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत के विद्यार्थियों को छात्रवृति भी देता है जिसका लाभ महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा लिया जाना चाहिए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ. विजय कुमार पंचोली, सहायक निदेशक, काॅलेज शिक्षा, परिक्षेत्र कोटा ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिविर में संस्कृत संभाषण का जो दीप जला है, वह निरन्तर जलता रहे और संस्कृत भाषा की संस्कृति को हमसे कोई नहीं छीन सकता।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डाॅ. सीमा चैहान ने बताया कि यह संस्कृत संभाषण शिविर एक सुखद प्रयास है और यदि हम संस्कृत में संवाद करना सीख जायेंगे तो अपनी संस्कृति को संरक्षित करना सम्भव होगा। संस्कृत की व्याकरण वैज्ञानिक है और कम्प्यूटर भाषा के लिए अत्यन्त उपयुक्त है। इस तरह के शिविर भविष्य में भी आयोजित किये जाने की अपेक्षा हैं। संस्कार भारती चित्तौड़ प्रान्त के महामंत्री श्री देवेन्द्र कुमार सक्सेना ने भी कार्यक्रम में सहभागिता दी।

सम्मानित मंच द्वारा संस्कृत विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त छात्रा को पुरस्कृत किया गया एवं संभाषण शिविर में भाग लेने वाली छात्राओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये। इस अवसर पर संस्कृत संभाषण प्रशिक्षक श्री दिनेश शर्मा ने अपने अनुभव साझा किये। कार्यक्रम में छात्राओं ने गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति भी दी।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की छात्रा दीपशिखा एवं प्रियंका ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। स्नेहा गौतम एवं दिव्यानी ने संस्कृत शिविर के अनुभव साझा किये।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य डाॅ. अनीता तम्बोली, श्रीमती मीरा गुप्ता, डाॅ. मनीषा शर्मा, डाॅ. हिमानी सिंह, डाॅ. श्रुति अग्रवाल, डाॅ. ज्योति सिडाना, डाॅ. धर्मसिंह मीणा, श्री संतोष कुमार मीना, डाॅ. सुनीता नागर एवं डाॅ. भूपेन्द्र राठौर आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में संस्कृत विभागाध्यक्ष डाॅ. राजमल मालव ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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