देवेंद्र सक्सेना,कोटा: संगीताचार्य प्रो. राजेंद्र माहेश्वरी जी के सम्मान में उनके परिवार जनों एवं शुभ चिंतकों द्वारा माहेश्वरी भवन, कोटा में एक भव्य संगीत सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उनका भव्य स्वागत और अभिनंदन भी किया गया।
दिग्गज विभूतियों ने की शिरकत
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन एवं भारतेंदु समिति कोटा के संरक्षक श्रीमान राजेश कृष्ण बिरला जी उपस्थित रहे। उनके साथ ही सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा डॉ. नवीन मित्तल, पूर्व सहायक निदेशक प्रो. रघुराज परिहार, पुलिस अधिकारी नंद लाल पवन, डॉ. एम एल गुप्ता, डॉ. संजय भार्गव, संगीत विभागाध्यक्ष प्रेरणा शर्मा, प्राचार्य डॉ. प्रेरणा सक्सेना, पूर्व प्राचार्य डॉ. वंदना आहूजा, डॉ. पुनीता श्रीवास्तव, संतोष कुमार मीना और निकिता मीणा ने भी कार्यक्रम में गरिमा बढ़ाई।
इसके अलावा संस्कार भारती चित्तौड़ प्रांत कोटा महानगर के महामंत्री देवेंद्र कुमार सक्सेना, मंचीय कला संयोजक डॉ. संगीता सक्सेना, वरिष्ठ पत्रकार अभिनंदन लड्डा और प्रसिद्ध तबला वादक घनश्याम राव सहित कला, संस्कृति, संगीत, शिक्षा एवं पत्रकारिता जगत से जुड़े कई सम्मानित व्यक्ति इस अवसर पर मौजूद रहे।
भजनों और भजनों से हुई शुरुआत
संगीत सभा का शानदार आरंभ अजमेर से पधारे डॉ. भागीरथ जोशी के सुमधुर भजनों के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय कर दिया।
युवा कलाकारों ने बांधा समां
संगीत संध्या में कोटा के युवा ग़ज़ल गायक सुरेंद्र रावल ने एक से बढ़कर एक गीत और ग़ज़ल की प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, कोटा की लोकप्रिय बेटी आस्था सक्सेना ने प्रो. राजेंद्र माहेश्वरी जी के प्रिय गीत “क्या जानूँ सजन होती है क्या गम की शाम” तथा ग़ज़ल “बेनाम सी ख्वाहिशें” की बेहद खूबसूरत प्रस्तुति दी। आस्था ने इन शानदार प्रस्तुतियों के जरिए माहेश्वरी जी को एक खूबसूरत सरप्राइज़ दिया, जिसकी सभी ने खूब सराहना की।
संगीताचार्य माहेश्वरी जी की सुमधुर आवाज़ से रसविभोर हुए श्रोता
कार्यक्रम के अंत में स्वयं संगीताचार्य डॉ. राजेन्द्र माहेश्वरी जी ने मंच संभाला। उन्होंने अपनी खनकती और सुमधुर आवाज़ में अपनी कुछ सबसे लोकप्रिय ग़ज़लें पेश कीं, जिनमें शामिल थीं:
1. आप जिनके क़रीब होते हैं वो बड़े खुशनसीब होते हैं…
2. ज़िंदगी की राह में ऐसे मक़ाम आने लगे…
3. जिस दिन से जुदा वो हमसे हुए इस दिल ने धड़कना छोड़ दिया…
इन सदाबहार प्रस्तुतियों को सुनकर सभागार में मौजूद सभी संगीत प्रेमी रस विभोर हो उठे और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा माहेश्वरी भवन गूंज उठा।



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