बलुवाकोट/किच्छा/सतपुली: डॉ. भीमराव आंबेडकर की आगामी जयंती के उपलक्ष्य में उनके बहुआयामी कृतित्व एवं दार्शनिक अवदानों को रेखांकित करने हेतु राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट, राजकीय महाविद्यालय किच्छा एवं राजकीय महाविद्यालय सतपुली की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन सेल (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी का मुख्य विषय “डॉ. बी.आर. आंबेडकर: विज़न, इमैजिनेशन एंड द अनफिनिश्ड मिशन” (डॉ. बी.आर. आंबेडकर: सामाजिक न्याय के दूरदर्शी एवं अपूर्ण मिशन) रहा।
प्रथम सत्र: आर्थिक परिप्रेक्ष्य और सामाजिक संरचना
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ डॉ. प्रकाश चंद्र भट्ट (राजकीय महाविद्यालय किच्छा) के सारगर्भित प्रस्तावना एवं विषय प्रवर्तन के साथ हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. अजीत कुमार (आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज) ने ‘इकोनॉमिक हिस्ट्री एंड आंबेडकर’ विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने आंबेडकर को केवल एक सामाजिक क्रांतिकारी ही नहीं, अपितु एक प्रखर अर्थशास्त्री के रूप में विश्लेषित करते हुए उनके आर्थिक सिद्धांतों का आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान स्पष्ट किया।
द्वितीय सत्र: विमर्श और तुलनात्मक अध्ययन
द्वितीय सत्र का कुशल संचालन राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट के इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार द्वारा किया गया। इस सत्र के मुख्य वक्ता, पुणे के सुप्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. लाहू गायकवाड़ ने आंबेडकर के वैचारिक फलक को विस्तृत रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर गहन अकादमिक विमर्श किया:
आर्थिक राष्ट्रवाद: दादाभाई नौरोजी के पूर्व आंबेडकर द्वारा प्रतिपादित आर्थिक सिद्धांतों की व्याख्या।
दलित नारीवाद: स्त्री मुक्ति और समता के संदर्भ में आंबेडकर का दृष्टिकोण।
तुलनात्मक विमर्श: आंबेडकर के विचारों का एम.एन. राय, रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी के दर्शन के साथ तुलनात्मक विश्लेषण।
तृतीय सत्र: समकालीन प्रासंगिकता एवं शोध प्रवृत्तियाँ
तृतीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. दीप्ति बिष्ट (राजकीय महाविद्यालय सतपुली) ने की। इस सत्र में राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट के प्राचार्य प्रो. सुभाष चंद वर्मा ने ‘बुद्ध और उनके धम्म’ की परंपरा में आंबेडकर के समतामूलक समाज के स्वप्न को वर्तमान भू-राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में व्याख्यायित किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. संजय कुमार (प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय सतपुली) ने आंबेडकरवादी विमर्श को ‘सबाल्टर्न स्टडीज’ (Subaltern Studies) और ‘उपनिवेशोत्तर विमर्श’ (Post-colonialism) के अकादमिक ढांचे में स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने शोधार्थियों को नए वैचारिक आयामों की खोज हेतु प्रेरित किया।
तकनीकी सत्रों व आयोजक महाविद्यालय की भूमिका निभा रहे रा० महा० किच्छा के प्राचार्य डॉ. राजीव रत्न ने आंबेडकर के अकादमिक साहित्य की उपलब्धता और उनकी वैचारिक विरासत को आत्मसात करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आयोजन समिति और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।परिचर्चा सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने ‘मिथक बनाम यथार्थ’ की अवधारणा पर बौद्धिक विमर्श किया, जिससे यह आयोजन अपनी पूर्णता को प्राप्त हुआ।
विभिन्न सत्रों में डॉ. पूर्णिमा (राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट) द्वारा सभी वक्ताओं एवं सहयोगियों को औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
इस अवसर पर तीनों महाविद्यालय के प्राध्यापक, विभिन्न अकादमिक विद्वान व छात्र मौजूद रहे।


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