May 3, 2026

Naval Times News

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तबला सम्राट पंडित किशन महाराज के पुण्य दिवस पर संक्षिप्त श्रध्दांजलि लेख

  • सदियों में जन्म लेते हैं तबला सम्राट पंडित किशन महाराज जैसे महान कलाकार….. 

कोटा :  तबला सम्राट पंडित किशन महाराज के पुण्य दिवस पर कोटा के देवेंद्र कुमार सक्सेना द्वारा संक्षिप्त श्रध्दांजलि लेख।

4 मई पुण्य तिथि 1980 के दशक में प्रख्यात तबला सम्राट पद्म विभूषण पंडित किशन महाराज के साथ इटारसी से भोपाल संगीत आयोजक पंडित सुरेश तातेड जी के आव्हान पर अभिनव कला परिषद एवं मधुवन के गुरु वंदना महोत्सव में भाग लेने से ट्रेन सफर कर रहा था।

  होशंगाबाद( नर्मदापुरम) सतपुड़ा के हरे भरे जगंलो के बीच से निकल रही थी वर्षा ऋतु का सुहाना मौसम था घुमाव दार रास्ते और पहाड़िया पंडित जी बार बार खिड़की से प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे थे बीच बीच में बात भी हो जाती

 रायसेन जिले में विंध्याचल की पहाड़ियों पर भीम बैठका गुफाओं का दृश्य आया तो इसे खोजने वाले पद्म श्री हरि विष्णु वाकणकर और उनके योगदान पर चर्चा हुई।

पंडित जी के शिष्य मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तबला गुरु पंडित बालकृष्ण महंत व मुझे उनकी पुत्री के विवाह समारोह में शामिल का अवसर प्राप्त हुआ

4 मई पुण्य दिवस पर प्रस्तुत है संक्षिप्त श्रध्दांजलि लेख……

 पंडित किशन महाराज जी का जन्म ब्रह्माण्ड की गूंज की नगरी काशी के कबीर चौरा मुहल्ले में तीन सितम्बर 1923 को श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पिता श्री हरि महाराज के यहाँ हुआ।

तबला वादन की शिक्षा पिता श्री से ले रहे थे कि अचानक पिताजी का स्वर्गवास हो गया…

 अब आगे की शिक्षा आपने अपने चाचा अपने समय के घुरंघर तबला सम्राट पंडित कंठे महाराज से लम्बे समय तक प्राप्त की। पंडित जी ने स्वतंत्र वादन के साथ-साथ एक वर्ष गायन, एक वर्ष वादन एवं एक वर्ष नृत्य की संगत का अभ्यास घंटों घंटों किया।

आपने विषम वक्र तालों को बजाने में महारत हासिल की। खास तौर तिहाई पैटर्न में क्राॅस रिद्म खेलने एवं जटिल गणना करने बौद्धिक क्षमता उनमें थी किसी भी मात्रा में तिहाई बजाकर वे सम पर आ जाते थे सभी तालों में उनका वादन गुणीजनों गुरुजनों को प्रभावित करता था। आम श्रोताओं को उनकी पडंत डमरू शंख घंटे नगाड़े की ध्वनि आकर्षित करती। धमार ताल में उनका और उनके वरिष्ठ शिष्य पद्म श्री कुमार बोस का द्वारा बजाया रिकॉर्ड सोशल मीडिया पर बहुत लोकप्रिय हुआ । मैं बार बार सुनता हूं तो मन ही नहीं भरता…

सचमुच कभी-कभी जन्म लेते हैं पंडित किशन महाराज जैसे महान कलाकार…

मुझे पांच छः बार उनका सानिध्य प्राप्त हुआ…उनकी पुत्री के विवाह समारोह में उन्होंने मुझे एवं मेरे मार्गदर्शक मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तबला वादक पंडित बालकृष्ण महंत को आमंत्रित किया।दो उन्हीं के घर में रूके वहां उपस्थित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब, गिरिजा देवी’ राजन साजन मिश्र आदि से पहली मुलाकात हुई

यह घटना 40 – 42 साल पुरानी है  तब मैं बीस वर्ष का था तबला के अभ्यास के साथ समाज संस्कृति संगीत विषय पर लेखन साक्षात्कार का कार्य करता था..

प्रसिद्ध गायक पंडित भीमसेन जोशी, तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन, पंडित सुरेश तलवलकर जैसे कई लोकप्रिय कलाकार पंडित जी के प्रति गुरु तुल्य श्रध्दां रखतें है ।

मेरे गुरु जी मृदंग महर्षि डॉ रामशंकर दास उर्फ पागलदास जी पंडित किशन महाराज जी के मित्र थे। अतः उनका मुझसे विशेष प्रेम था यह बात उन्होंने एक पत्र के माध्यम से मुझे लिखी कि तुम मेरे प्रिय मित्र पागलदास जी के शिष्य हो….

उन्होंने पद्म श्री पंडित कुमार बोस, सुख मिंदर सिंह नामधारी, डाॅ 0 अरविंद कुमार आजाद, बालकृष्ण अय्यर, पंडित नंदन मेहता, संदीप दास, पुंडरीक भागवत, शुभ महाराज, हिमांशु महंत आदि अपने अपने क्षेत्र के धुरंधर शिष्य देश को दिये…. जिन्होंने विदेश की धरती पर बनारस घराने का तबला प्रचारित किया।

 आपने सत्यजीत रे की फिल्म नीचा नगर, आंधियां एवं बड़ी मां में तबला वादन किया म्यूजिक टुडे की सीडी केसेट में तबला वादन किया। आकाशवाणी दूरदर्शन के राष्ट्रीय कार्यक्रमों आपके स्वतंत्र तबला वादन के कार्यक्रम प्रसारित हुए।

आप ब्रिटेन आदि देशों में भी भारतीय संगीत व बनारस घराने के प्रसिद्ध तबला वादक के रूप में शामिल होने गये…

 आप कुशल संगतकार भी थे आपने गायन में पंडित ओकांर नाथ ठाकुर, फैयाज खान, उस्ताद बड़े गुलाम अली खान , पंडित भीमसेन जोशी, बसंत राव, गिरिजा देवी,

वादन में उस्ताद अलाउद्दीन खां, उस्ताद हाफ़िज़ अली खान, पंडित रविशंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां, अली अकबर खां पंडित रामनारायण, उस्ताद विलायत खान, पंडित निखिल बनर्जी, अमजद अली खान, डाॅ शरणरानी माथुर, डॉ0 एन राजम, नृत्य में नटराज गोपी कृष्ण, पंडित शंभू महाराज, सितारा देवी, पंडित बिरजू महाराज, रोशन कुमारी आदि सहित सैकड़ों नाम है।

आपको भारत सरकार 1973 में पद्म श्री अवार्ड तथा सीधे 2002 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया पद्मविभूषण प्राप्त करने वाले तबले के प्रथम तबला वादक हैं ।

भारत रत्न लता मंगेशकर जी द्वारा आपको पंडित दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड से सम्मानित किया गया। उस्ताद हाफ़िज़ अली खान सम्मान, केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, कालिदास सम्मान, अभिनव कला परिषद भोपाल द्वारा अभिनंदन, तबला पुरूष सम्मान आदि उल्लेखनीय है।

आप कुश्ती, पतंग बाजी, घुड़सवारी, लेखन आदि में भी रूचि रखते थे।

आपने देश के दो बड़े संगीत समारोह संकट मोचन संगीत सहारोह काशी में आरंभ कराने में, सप्तक संगीत समारोह अहमदाबाद के लिये अपने शिष्य पंडित नंदन मेहता विदुषी मंजू मेहता जी विशेष प्रोत्साहित किया।

एक बार मुझ अकिंचन (देवेंद्र सक्सेना )की प्रार्थना पर लाखों की फीस छोड़ कर अभिनव कला परिषद भोपाल आये व  जो सम्मान जनक राशि संस्था ने भेंट की उसे स्वीकार कर लिया।

पंडित किशन महाराज जी ने भूकम्प बाढ़ पीड़ितों की सहायता हेतु सहायता राशि राहत कोष में जमा की, दूरदर्शन केंद्र की स्थापना के लिए भूख हड़ताल की, संगत कलाकारों के लिए सरकार की उदासीनता का पुरजोर विरोध किया। महाप्रयाण :-4 मई 2008 खजूरी उत्तर प्रदेश में पंडित जी संगीत जगत को अलविदा कह दिया।

 अपने पीछे छोड़ गए पुत्र प्रख्यात तबला वादक पंडित पूरण महाराज, पुत्री अंजलि पूर्णिमा, इंदिरा नाति पंडित शुभ महाराज तथा अनगिनत गुणी शिष्य प्रशिष्य परम्परा

बनारस के ताल ऋषियों को श्रध्दांजलि…

बनारस घराने के प्रवर्तक पंडित रामसहाय जी, भैरों सहाय,बीरू मिश्र कंठे महाराज, अनोखे लाल,पंडित किशन महाराज, पंडित सामता प्रसाद गुदई महाराज, पंडित दरगाही मिश्र, पंडित गामा महाराज, पंडित शारदा सहाय, राम जी मिश्र, छोटे लाल मिश्र आदि ताल ऋषियों तबला गुरुओं को शत शत नमन

देवेंद्र कुमार सक्सेना 

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