January 25, 2026

Naval Times News

निष्पक्ष कलम की निष्पक्ष आवाज

देवभूमि की आवाज बने युवा, बोले संकल्प की भाषा – “ज्ञान, संस्कृति और नवाचार से गढ़ेगा आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड”

उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना के रजत जयंती समारोह के अवसर पर राज्य स्तरीय आशुभाषण प्रतियोगिता (Extempore Debate) का भव्य आयोजन श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय परिसर, ऋषिकेश में आयोजित हुआ।

यह प्रतियोगिता उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड शासन के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसमें राज्यभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपनी वाक्शक्ति और विचारशीलता का शानदार प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र भसीन, उपाध्यक्ष, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति ने अपने उद्बोधन में कहा कि “उत्तराखण्ड की रजत जयंती सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि राज्य की सफल यात्रा, आत्मनिर्भरता और युवाशक्ति की उपलब्धियों का प्रतीक है। शिक्षा वही सार्थक है जो विचार को कर्म से जोड़े और युवाओं को नेतृत्व के लिए प्रेरित करे।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के माध्यम से राज्य में उच्च शिक्षा को व्यावहारिक, रोजगारपरक और प्रौद्योगिकीय रूप से सशक्त बनाया जा रहा है, जिससे युवा केवल ज्ञान प्राप्त न करें, बल्कि नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने अपने उत्साहवर्धक भाषण में कहा कि “आज हम देवभूमि उत्तराखण्ड की उस पवित्र भूमि को नमन कर रहे हैं, जहाँ के हर कण में त्याग, परिश्रम और श्रद्धा की सुगंध बसती है। यह दिन हमारे स्वाभिमान, हमारे संघर्ष और हमारे संकल्प का प्रतीक है।”

उन्होंने कहा कि राज्य की स्थापना हजारों माताओं, बहनों, युवाओं और वरिष्ठों के बलिदान का फल है, जिन्होंने “अपना राज्य – अपनी पहचान” का सपना देखा था। 9 नवम्बर 2000 को जब उत्तराखण्ड भारत के 27वें राज्य के रूप में स्थापित हुआ, तो वह दिन हर पर्वतीय निवासी के सपनों की पूर्ति था। कुलपति महोदय ने कहा कि पिछले पच्चीस वर्षों में राज्य ने आर्थिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य, औद्योगिक और पर्यावरणीय विकास के क्षेत्र में गौरवपूर्ण सफलताएँ प्राप्त की हैं। एम्स ऋषिकेश, चारधाम ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन जैसी परियोजनाएँ उत्तराखण्ड के उज्ज्वल भविष्य की प्रतीक हैं।

“उत्तराखण्ड की महिलाएँ हमेशा से समाज की धुरी रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ आज स्वरोजगार का प्रतीक हैं और हमारे युवा नवाचार के दूत बन रहे हैं। शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल लर्निंग पर राज्य का बल उसे ज्ञान का राज्य बना रहा है।” कुलपति जी ने समापन में संदेश दिया कि

“प्रिय साथियो, उत्तराखण्ड सिर्फ एक राज्य नहीं बल्कि एक भावना, एक संस्कार और एक संघर्ष का प्रतीक है। आइए, हम सब मिलकर शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के माध्यम से एक नया और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड निर्मित करें।”

कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में स्थानीय विधायक डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि “राज्य की वास्तविक शक्ति उसका युवा वर्ग है। जब युवाओं की ऊर्जा, ज्ञान और अनुशासन एक दिशा में प्रवाहित होते हैं, तो उत्तराखण्ड विकास के नए शिखर छूता है।” उन्होनें बताया कि “आशुभाषण प्रतियोगिताएँ युवाओं में आत्मविश्वास और वक्तृत्व कौशल को निखारने का श्रेष्ठ मंच हैं। यह विश्वविद्यालय युवा वर्ग में सकारात्मक चिंतन की नई लहर लाया है।”

राज्य स्तरीय इस आशुभाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अद्भुत वक्तृत्व-कौशल का प्रदर्शन करते हुए Law College Dehradun Uttaranchal University, Dehradun ने प्रथम स्थान DBS Global University, Dehradun ने द्वितीय स्थान तथा D.S.B. Campus, Kumaun University, Nainital ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

विजेताओं को मंच पर सम्मानित कर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए और सभी ने यह संकल्प लिया कि “हम सब मिलकर ज्ञान, संस्कृति और नवाचार के माध्यम से उत्तराखण्ड को एक आत्मनिर्भर, शिक्षित और प्रेरणादायी राज्य बनाएँगे।”

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री दिनेश चंद्रा, परिसर निदेशक प्रो0 महाबीर सिंह रावत, कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. हेमलता मिश्रा सहित अन्य सभी अध्यापकगण, अधिकारीगण एवं कर्मचारी, तथा छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ऋषिकेश परिसर के सभी प्राध्यापक और क्षेत्रीय गणमान्य जन की उपस्थिति से वातावरण गौरवमय बना रहा।

यह प्रतियोगिता न केवल विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता का मंच बनी, बल्कि राज्य की रजत जयंती के अवसर पर उत्तराखण्ड की एकता, प्रगति और गौरव का सशक्त प्रतीक भी सिद्ध हुई। परिसर की पत्रिका प्रेरणा का विमोचन भी हुआ मुख्य संपादिका प्रो कल्पना पंत हैं।

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