January 21, 2026

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बुरांश अपनी सुंदरता के साथ-साथ सेहत के लिए भी गुणकारी:डॉ अशोक अग्रवाल

देवभूमि की सुंदरता में चार चांद लगाने वाला फूल बुरांश अपनी सुंदरता के साथ सेहत के लिए भी गुणकारी है l बुरांश वृक्ष के बारे में जानकारी देने वाला डॉ अशोक कुमार अग्रवाल का यह लेख बहुत ही ज्ञानवर्धक है

डॉ अशोक कुमार अग्रवाल आप राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी, उत्तराखंड में असिस्टेंट प्रोफेसर वनस्पति विज्ञान एवं पर्यावरण वैज्ञानिक हैं l

बुरांश (रोड़ोंडेंड्रोंन) सुंदर फूलों वाला एक वृक्ष है, देवभूमि की सुंदरता में चार चांद लगाने वाला फूल बुरांश पर्वतीय अंचलों में खिल गया है l आजकल ऊंची पहाड़ियों पर खिलने वाले बुरांश के सुर्ख लाल फूलों से पहाड़िया भरी हुई है, इससे पर्वतीय क्षेत्रों के जंगलों का नजारा बहुत खूबसूरत नजर आ रहा है l जंगलों में खिले बुरांश के फूल पर्यटको के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं l

बुरांश झाड़ी अथवा वृक्ष की ऊंचाई वाला पौधा है, यह लगभग 10 मीटर तक ऊंचाई वाला होता है l जो एरिकेसिई कुल में रखा जाता है इसकी लगभग 300 जातियां उत्तरी गोलार्ध की ठंडी जगहो पर पाई जाती हैं l वृक्ष की सुंदरता और सुंदर गुच्छेदार फूलों के कारण यहां पर्वतीय क्षेत्रों में काफी प्रचलित है l

भारत में बुरांश की जातियां पूर्वी हिमालय पर बहुतायत से मिलती हैं l इसका वनस्पतिक नाम रोड़ोंडेंड्रोंन आरबोरियम अपने सुंदर चमकदार सुर्ख लाल रंग के फूलों के लिए विख्यात है l बुरांश हिमालई क्षेत्रों में लगभग 1500 से 3000 मीटर की मध्यम ऊंचाई पर पाया जाने वाला सदाबहार वृक्ष है l बुरांश के पेड़ों पर मार्च – अप्रैल माह में लाल सुर्ख रंग के फूल खिलते हैं l बुराश लाल, गुलाबी और सफेद तीन रंगों मैं पाया जाता है l हिमालय की तलहटी में जहां लाल और गुलाबी रंग के बुरांश अपनी सुंदरता बिखेरते हैं, तो उच्च हिमालई क्षेत्रों में सफेद रंग का बुरांश मिलता है l कहा जाता है कि बसंत ऋतु में यहां फूल सभी फूलों से पहले खिल जाता है l

बता दें कि उत्तराखंड का राज्य वृक्ष बुरास नेपाल का राष्ट्रीय फूल है, हिमाचल और नागालैंड राज्यों में इसे राज्य पुष्प का दर्जा प्राप्त है l भारत के हिमालयी क्षेत्रों में यहां जंगली रूप में पाया जाता है l बुरांश नमीयुक्त शीतोषण क्षेत्रों में लगभग 11000 फुट की ऊंचाई तक उगाया जाता है बुरांश के लिए अम्लीय मृदा का पीएच मान 5 या उससे कम है, अच्छा रहता है बुराश का वृक्ष रेतीली व पथरीली भूमि में नहीं उगता l

बुरांश मैं भोजन लेने वाली जड़े मिट्टी की ऊपरी सतह पर होती हैं, अतः उन पर गर्मी और सूखे का दुष्प्रभाव जल्दी से दिखाई देता है l प्राकृतिक रूप से इसका प्रसारण बीजों द्वारा होता है, जबकि साधारणयता कलम इसके प्रवर्धन का अच्छा माध्यम है l बुरांश अपनी सुंदरता के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी विख्यात है, बुरांश के फूलों का इस्तेमाल दवाइयों में किया जाता है l बुरांश की पंखुड़ियों से निकलने वाला गुणकारी रस हृदय व उदर रोग के लिए लाभकारी माना जाता है l

बुरांश के फूलों की चटनी भी बनाई जाती है l पेयजल स्रोतों को यथावत रखने में बुरांश महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है l इसकी लकड़ी का उपयोग कृषि यंत्रों के हैंडल बनाने में किया जाता है, इसके फूलों का उपयोग रंग बनाने के लिए भी किया जाता है l इसकी पत्तियों का उपयोग भी कई बीमारियों में लाभकारी माना जाता है l

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