‘विजन फॉर विकसित भारत@2047’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस पर की-नोट वक्ता के रूप में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. के.के. वर्मा ने कहा कि अवस्थापना और गतिशक्ति से जुड़ी राष्ट्रीय परियोजनाएँ विकसित भारत के लक्ष्य को नई गति देंगी।
उन्होंने ‘एसबीआई इकोरैप 2023’ रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत 2027 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़कोट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजू भट्ट ने युवाओं की बुनियादी शैक्षिक चुनौतियों को रेखांकित करते हुए समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को विकसित भारत की अनिवार्य शर्त बताया। ऋषिकेश परिसर के प्रो. अशोक मैंदोला ने भाषाई विविधता के संरक्षण को राष्ट्रीय सांस्कृतिक शक्ति से जोड़ते हुए इसे विकसित भारत की आवश्यक आधारशिला बताया।
द्वितीय दिवस के अकादमिक सत्र में देश विदेश के शोधार्थियों ने ऑफलाइन/ ऑनलाइन माध्यम से शोध पत्र प्रस्तुत किए। ऑफलाइन प्रस्तुतियों में एम.पी.जी. कॉलेज मसूरी के अरविंद उनियाल व सुमित्रा, जेएनयू के निखिल विश्वास, शांभवी, कोरिया से कांग कॉन्ग,साउथ अफ्रीका से विसेल एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की माधुरी उनियाल तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की डॉ. रेनू कीर , डॉ बाला देवी आदि सभी प्रतिभागी शामिल रहे। सत्र की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. अमनदीप नहर ने की, जबकि डॉ. दिव्या वर्मा (गुरु राम राय विश्वविद्यालय) और डॉ. नेहा घड़ियाल सह-अध्यक्ष रहीं।
संगोष्ठी की संरक्षक एवं अध्यक्ष प्रो. प्रणिता नंद ने स्वागत संबोधन में विकसित भारत के संदर्भ में किसानों के लिए विशेष योजनाओं और कौशल आधारित शिक्षा पर बल दिया। कार्यक्रम करियर काउंसलिंग एवं स्किल डेवलपमेंट सेल के द्वारा वाणिज्य, अर्थशास्त्र एवं रसायन शास्त्र विभागों के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी संयोजक रहें संजय कुमार ने कहा कि “विकसित भारत@2047 केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्र का सामूहिक संकल्प है। इस मंच के माध्यम से हम युवा शक्ति, समावेशी शिक्षा, कृषि सशक्तिकरण और कौशल विकास को एकीकृत कर आत्मनिर्भर, समावेशी और सतत भारत की ठोस दिशा तय कर रहे हैं।”
उन्होंने सभी वक्ताओं एवं 400 से अधिक प्रतिभागियों, शोधार्थियों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही इस संगोष्ठी को सार्थक सफलता मिली है।
कार्यक्रम में डॉ. रश्मि उनियाल, डॉ. संजय मदान सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, कर्मचारी, छात्र और शोधार्थी उपस्थित रहे। अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के प्रथम एवं द्वितीय दिवस के तकनीकी सत्र में शोध पत्र प्रस्तुति के संचालन में डॉ कमल बिष्ट, डॉ विजय प्रकाश, डॉ हिमांशु जोशी डॉ. संजय महर, डॉ राजपाल सिंह रावत अजय और आदित्य आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जबकि नामांकन एवं प्रमाणपत्र लेखन में संयोजक प्रमाणपत्र लेखन समिति डॉ नताशा एवं उन्की पूरी टीम द्वारा सफ़लतापूर्वक सम्पन्न किया गया, मीडिया सेल के डॉ. विक्रम सिंह बर्त्वाल ने कार्यक्रम की जानकारी दी।


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