April 13, 2026

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महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना पर हुआ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

चिन्यालीसौड़: राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ में आज दिनांक 07 अप्रैल 2026 को विद्यार्थियों को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) के बारे में जागरूक करने हेतु एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के करियर काउंसलिंग एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को इस योजना के माध्यम से मिलने वाले व्यावहारिक अनुभव, कौशल विकास तथा रोजगार के अवसरों की जानकारी प्रदान करना रहा।

कार्यक्रम में बताया गया कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की घोषणा बजट 2024-25 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को देश की प्रमुख कंपनियों में इंटर्नशिप के माध्यम से वास्तविक कार्य अनुभव प्रदान करना है।

इस योजना के तहत 6 से 9 माह की इंटर्नशिप दी जाएगी, जिससे विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करने में सहायता मिलेगी।

योजना के अंतर्गत 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा। चयनित अभ्यर्थियों को प्रतिमाह आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी तथा सफलतापूर्वक इंटर्नशिप पूर्ण करने पर प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर प्रभात द्विवेदी जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी अत्यंत आवश्यक है। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना विद्यार्थियों के लिए एक सुनहरा अवसर है, जिससे वे अपने कौशल का विकास कर भविष्य में बेहतर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। सभी विद्यार्थियों को इस योजना का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. किशोर सिंह चौहान ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह योजना युवाओं को प्रशिक्षण, अनुभव और स्किल प्रदान कर उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इच्छुक विद्यार्थी आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कर आसानी से आवेदन कर सकते हैं।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पंजीकरण प्रक्रिया, पात्रता, तथा आवेदन से संबंधित सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी गई।

मंच संचालन डॉ नेहा बिष्ट ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉ रजनी चमोली, डॉ आलोक बिजल्वाण एवं डॉ मंजू पांडे का योगदान रहा।

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