January 26, 2026

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महाविद्यालय नैनबाग टिहरी गढ़वाल की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने उत्तराखंड स्थापना के रजत जयंती को धूमधाम से मनाया

आज दिनांक 09नवंबर 2025 को राजकीय महाविद्यालय नैनबाग टिहरी गढ़वाल की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने उत्तराखंड स्थापना के रजत जयंती को धूमधाम से मनाया|

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम सभा टटोर की ग्राम प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ दिनेश चंद्र ने अतिथियों का स्वागत कर मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर कार्रवाई |राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय शिविर में विगत “25 वर्षों में उत्तराखंड की क्या उपलब्धि रही और क्या चुनौतियां होगी” विषय पर चर्चा की| सर्वप्रथम महाविद्यालय की राजनीति विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ मधुबाला जुवांठा ने विस्तार पूर्वक जानकारी दी| उन्होंने उत्तराखंड के इतिहास से लेकर भूगोल ,संस्कृति, अर्थव्यवस्था के साथ सभी पहलुओं पर चर्चा की।

डॉ जुवांठा ने कहा कि किस प्रकार से उत्तराखंड के आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर इस प्रदेश की स्थापना की| फिर बीए प्रथम वर्ष की स्वयंसेवी कुमारी कशिश राघव ने इस विषय पर अपनी बात रखी उनका कहना था कि कई क्षेत्रों में उत्तराखंड ने अभूतपूर्व विकास किया है , फिर भी उत्तराखंड की कई प्रकार की चुनौतियां हैं| इनके पश्चात इसी विषय पर कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर चंद्रा ने अपनी बात रखी| उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का जिक्र न केवल साहित्यिक में वरन पुरातात्विक साक्ष्यों में भी देखने को मिलता है| जहां एक और ऋग्वेद नामक ग्रंथ में उत्तराखंड के लिए मनीषियों की भूमि शब्द का प्रयोग किया गया है तो वही बौद्ध ग्रंथों में इसे हेमवंत शब्द से पुकारा गया है।

उत्तराखंड एक पृथक प्रांत होगा इसकी बात सर्वप्रथम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के द्वारा आयोजित 1938 के विशेष अधिवेशन, जो श्रीनगर गढ़वाल मैं आयोजित किया गया, में पंडित जवाहर लाल नेहरू के सामने की गई थी| परंतु देश स्वतंत्रता के पश्चात भी ऐसा नहीं हो पाया, विभिन्न प्रकार के राज्य पुनर्गठन आयोगों की स्थापना की गई परंतु यहां के लोगों की मांग पूरी नहीं हुई ।

फिर जब जुलाई 1979 ईस्वी में मसूरी में उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना हुई उसके पश्चात आंदोलन अपनी चरम पर पहुंचा| इसी बीच विभिन्न प्रकार के आंदोलन हुए| अंततः 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड उत्तर प्रदेश से पृथक राज्य के रूप में स्थापित हुआ।

उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों में उत्तराखंड ने कई क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की, चाहे वह औद्योगिक क्षेत्र हो, शिक्षा का क्षेत्र हो, स्वास्थ्य सेवाएं हो, सड़कों का निर्माण हो| परंतु फिर भी हमारे सामने कई प्रकार की चुनौतियां हैं उन्होंने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड के सामने सबसे बड़ी समस्या या चुनौती पलायन को रोकना है, स्वस्थ सेवाएं सुदृढ करनी है, उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार देना है, प्राकृतिक आपदाओं से कैसा निपटा जाए, साथ ही पारदर्शिता पर भी जोर देने की बात की गई।

इनके पश्चात् महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉक्टर परमानंद चौहान ने अपने विचार प्रस्तुत किये।

फिर महाविद्यालय की छात्राओं के द्वारा विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए | फिर रजत जयंती के अवसर पर जो-जो कार्यक्रम करवाए गए थे उनके विजेताओं को पुरस्कार दिया गया | इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर मुकेश कुमार ने रजत जयंती की शुभकामनाएं प्रस्तुत कर छात्र-छात्राओं को अपना आशीर्वचन दिया| इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीमती मनीषा चौहान ने कहा कि मेरे स्तर की महाविद्यालय को कभी भी आवश्यकता हो तो मैं उसे जरूर पूरा करूंगी।

अंत में महाविद्याल की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ मंजू कोगियाल ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया ।

इस अवसर पर प्राध्यापक डॉक्टर ब्रीश कुमार, परमानंद चौहान, डॉ मधुबाला जुवांठा, डॉ दुर्गेश कुमारी , डॉ दिनेश चंद्र, योग शिक्षक राजमोहन सिंह रावत,शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती रेशमा बिष्ट, पुस्तकालय अध्यक्ष श्रीमती मीनाक्षी डिमरी, कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सुशील चंद्र कुकरेती, प्रयोगशाला सहायक भुवन चन्द्र डिमरी, पुस्तकालय सहायक दिनेश सिंह पवार, अनु सेवक अनिल नेगी, रोशन रावत,श्रीमती रीना पवार, मोहनलाल एवं पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष महेश तोमर के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रही |

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