कोटा 22.01.26 : राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, कोटा की अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (उच्च शिक्षा) इकाई द्वारा आज दिनांक 22.01.2026 को भारत रत्न नेता जी सुभाष चंद्र बोस एवं भारतीय सनातन संस्कृति के प्रकाश स्तम्भ स्वामी विवेकानंद जी को समर्पित कर्तव्य बोध दिवस का आयोजन किया गया।
जिसकी अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. सीमा चौहान ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. एम.एल. गुप्ता, पूर्व प्रशासनिक सचिव, कोटा विश्वविद्यालय, कोटा एवं लोकपाल, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. विजय कुमार पचौली, सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा परिक्षेत्र कोटा रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ माँ शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। श्री संतोष कुमार मीणा, जिला संयोजक ए.बी.आर.एस.एम. ने माल्यार्पण और उपर्णा पहनाकर अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “न स्वार्थ की चाह न नाम की होड़, कर्तव्य निभाना ही है कर्तव्य बोध।”
मुख्य वक्ता डॉ. विजय कुमार पचौली ने अपने वक्तव्य में कहा कि कर्तव्य बोध दिवस प्रतिवर्ष 12 जनवरी, स्वामी विवेकानंद जयंती से 23 जनवरी सुभाष जयंती के बीच मनाया जाता है। भारतवर्ष में हर युग में कर्तव्य की प्रधानता रही है, चाहे वैदिक काल हो, महाभारत काल हो या रामायण काल। श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध में अर्जुन का रथ चलाकर भी कर्तव्य पालन किया था। श्रीराम ने रामायण काल में 14 वर्ष के वनवास में सम्पूर्ण भारत में भ्रमण करके समाज में समरसता लाने के लिए कर्तव्य का पालन किया।
वर्तमान में जो हमें पद मिला है, क्या हम उसका पूर्ण निष्ठा से कर्तव्य पालन कर रहे हैं, आज हम सबके लिए आत्मावलोकन करने की आवश्यकता है। यदि हम पूर्ण निष्ठा से अपना कर्तव्य पालन करेंगे तभी समाज के समक्ष आदर्श प्रस्तुत कर सकेंगे। विद्यार्थियों के व्यक्तिगत एवं सम्पूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए हम सभी आचार्यों का यह दायित्व है। हम सभी को सरकारी सेवा नियमों और वित्तीय नियमों की जानकारी होनी चाहिए। हमारे कर्तव्य का हिस्सा है। हम सभी के अंदर ईश्वर विराजमान हैं, जो हमें अपने कर्म का फल अवश्य देता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. एम.एल. गुप्ता ने गीता का श्लोक “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” का उदाहरण देते हुए कहा कि गीता का उपदेश आध्यात्मिक उपदेश नहीं है, यह कर्तव्य गाथा है। जीवन में पूर्ण निष्ठा व समर्पण से कार्य करने पर सफलता निश्चित रूप से मिलती है, अतः निरंतर कार्य करते रहना ही कर्तव्य बोध है। उन्होंने गौतम बुद्ध और सुभाष चन्द्र बोस के जीवन के उदाहरणों के द्वारा कर्तव्य पालन का आह्वान किया।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि देश की आज़ादी के लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और आज भी हमारे सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। यदि देश का हर नागरिक अपने कर्तव्य का पालन करे तो आत्मनिर्भर, स्वावलंबी एवं विकसित, विश्वगुरु भारत का सपना साकार हो सकता है। अतः हम सभी कर्तव्य पालन द्वारा सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन लाकर मानवता के विकास में योगदान दें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही डॉ. सीमा चौहान ने कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं। कर्तव्य बोध आंतरिक बल और इच्छा पर निर्भर करता है। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक रहेंगे तो शैक्षिक वातावरण बहुत अच्छा रहेगा।
डॉ. राजेन्द्र माहेश्वरी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि कर्तव्य वह चुंबक है जिसके आकर्षण में अधिकार स्वयं चले आते हैं।
कार्यक्रम का संचालन जिला ईकाई सचिव संतोष कुमार मीना ने किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठतम संकाय सदस्य श्रीमती प्रेरणा शर्मा, श्रीमती मीरा गुप्ता, श्रीमती सपना कोटरा, डॉ. सुनीता शर्मा, डॉ 0 पुनीता श्रीवास्तव, डॉ. बिंदु चतुर्वेदी,डाॅ 0 उमा बडौलिया डॉ. मनीषा शर्मा,श्रुति अग्रवाल, डॉ 0 धर्म सिंह मीना, डॉ 0 हर्षा जैन सहित बड़ी संख्या में संकाय सदस्य अधिकारी कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित थे
कार्यक्रम को सफल बनाने में तबला वादक देवेंद्र सक्सेना (महामंत्री संस्कार भारती), कर्मचारी रामकुमार, बृजेश, आदि समस्त संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं।


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