कोटा, 24 फरवरी: भाजपा राजस्थान के कोटा संभाग मीडिया संयोजक अरविन्द सिसोदिया ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा हाल ही में भजनलाल शर्मा सरकार की “2 साल बनाम 5 साल” बहस की चुनौती पर दिए निम्नस्तरीय शब्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “लोकतंत्र की स्वामी जनशक्ति होती है। उसके सामने राज्य सरकार का हिसाब-किताब रखना अच्छी बात है।
भजनलाल शर्मा सरकार का निर्णय स्वागत योग्य और प्रशंसनीय है। वे अपने कामकाज को सदन में रखकर उस पर चर्चा कर रहे हैं और कांग्रेस सदन से भाग रही है।यह राजस्थान के जनमत का भी अपमान है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा “2 साल बनाम 5 साल” पर विधानसभा में चर्चा करवाने का साहस मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार के ईमानदार प्रयासों और नवाचार का स्वागत योग्य तथा प्रशंसनीय कदम है।
सिसोदिया ने कहा कि “कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत की निम्नस्तरीय और गिरी हुई भाषा में की जा रही बयानबाजी लोकतंत्र विरोधी है।” उन्होंने कहा, “जनता को हिसाब-किताब देना, तुलनात्मक अध्ययन करना और उस पर बहस करना स्वस्थ लोकतंत्र का हिस्सा है। यह विकास और लोककल्याण के प्रति समर्पण और कर्तव्य को दर्शाता है।
सिसोदिया ने कहा कि “पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत पुराने राजनीतिज्ञ हैं और अपनी ही पार्टी में उपेक्षित चल रहे हैं। वर्तमान कांग्रेस में हल्के शब्दों और निम्न स्तर की राजनीति को वरीयता दी जा रही है। गहलोत स्वयं को बनाए रखने और कांग्रेस हाईकमान को खुश करने के लिए अपने जीवन की सबसे गिरे स्तर की राजनीति पर उतर आए हैं।
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि “गहलोत हल्की और निम्न स्तर की भाषा का प्रयोग कर हाईकमान को खुश रखने की कोशिश कर रहे हैं। यह आचरण उनकी हताशा, विफलता और जबरिया लाइमलाइट में बने रहने की कोशिश को दर्शाता है।” उन्होंने कहा कि “प्रदेश की जनता अब सकारात्मक, जवाबदेह और विकासोन्मुख राजनीति चाहती है। वह कांग्रेस के व्यक्तिगत आक्रमणों, कटाक्षों और टुच्चेपन की राजनीति से ऊब चुकी है।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि “गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस स्थायी जनादेश कायम नहीं रख सकी। वे जब भी मुख्यमंत्री बने, जनता ने अगली बार उनकी सरकार को हटा दिया।पशंद नहीं किया बल्कि सत्ता परिवर्तन किया। क्योंकि वे जनता के प्रति जवाबदेह नहीं थे।
सिसोदिया ने कहा, “पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत अपनी गत सरकार में पौने पाँच साल तक मुख्यमंत्री की कुर्सी कमर से बांध कर सोते थे। सरकार सचिवालय से नहीं, फाइव स्टार होटल से चलती थी। राजस्थान की जनता ने गहलोत और पायलट के संघर्ष में पूरे पाँच साल भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को झेला। पेपर लीक और नौकरियों में मनमानी तथा भ्रष्टाचार उनके शासन की बदनामी और कुख्याति की पहचान है। गहलोत को शासन और सरकार पर बात करने का भी कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
पिछली सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि “उस दौरान राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना रहा और पार्टी के भीतर ही असंतोष खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा सार्वजनिक असहमति जताना इस बात का संकेत था कि गहलोत सरकार अपने ही दल को एकजुट रखने में सफल नहीं रही। वहीं भाजपा सरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में एक जुट और जनसेवा में रत है।
उन्होंने कहा कि “पूर्व गहलोत सरकार आपसी फूट,प्रशासनिक अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसे मामलों में निरंतर घिरती रही, जिसके चलते राजस्थान की जनता ने उन्हें गद्दी से उतार दिया। लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही असलियत का दर्पण होता है। गहलोत को अपनी गिरेबान में झांककर देखना चाहिए कि अब वे अप्रासंगिक हो चुके हैं।


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