हरिद्वार, 2अगस्त: SIR की कठिनाइयाँ झेल रही जनता की ओर से जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष राव आफाक अली ने प्रेस क्लब, हरिद्वार में प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि एक परिवार का मुखिया था। दीपावली से पूर्व परिवार के बच्चों ने मुखिया से पटाखे, कपड़े और मिठाइयों की माँग की।
मुखिया उन माँगों को पूरा करने में सक्षम नहीं था, क्योंकि वह नकारा और निकम्मा था। उसने एक चाल चली। दीपावली से दो दिन पूर्व ही उसने पड़ोस में पत्थर फेंक दिए।
हंगामा इतना बढ़ा कि उसके बच्चों को पुलिस उठाकर ले गई। तब बच्चों की माँ और रिश्तेदार थाने पहुँचे। बच्चों ने रो-रोकर कहा, “मम्मी, हमें कपड़े, मिठाई और पटाखे नहीं चाहिए। हमारी जमानत के लिए आप चार लोगों को लेकर आइए, जिनके पास उनकी प्रॉपर्टी के कागजात, आधार कार्ड, पहचान पत्र और दो-दो फोटो हाँ, ताकि हम जेल जाने से बच जाएँ और हमारा भविष्य खराब न हो।”
बच्चों की माँ और रिश्तेदार जमानत के कागज़ों की तलाश में जुट गए और दीपावली के कपड़े, मिठाई और पटाखे भूल गए।
ठीक उसी प्रकार देश की आज़ादी के 80 साल बाद आज देश के नागरिकों को नोटबंदी, लॉकडाउन, हिंदू-मुस्लिम और SIR जैसे मामलों में उलझाकर रखा गया है, ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की माँग न करें। जबकि हकीकत यह है कि 2011 के बाद सरकार जनगणना तक नहीं करा पाई और आज तक एक भी ऐसी आईडी नहीं बना पाई, जिसे दिखाकर भारतीय नागरिक गर्व से कह सके कि “मैं भारतीय हूँ।”
राव आफाक अली ने कहा कि आधार कार्ड सरकार का एक जासूस है, जो आपकी गोपनीयता, निजता, प्रॉपर्टी तथा पैसों की जानकारी सरकार तक पहुँचाता है।
राव आफाक अली ने कहा कि सरकार को आधार कार्ड को शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक, प्रॉपर्टी, निर्वाचन और परिवार से जोड़ना चाहिए तथा इसी आधार कार्ड को भारतीय नागरिकता के वास्तविक प्रमाण का दर्जा देना चाहिए, न कि तीन-तीन, चार-चार आईडी माँगकर जनता को परेशान करना चाहिए।
मनोज धनगर ने कहा कि 2003 की वोटर लिस्ट को सरकार ने हिंदी से अंग्रेज़ी में परिवर्तित किया, जिससे धनगर बहुत से लोगों के नामों की स्पेलिंग गड़बड़ा गई और अब वे लोग परेशान हैं।
दूसरी बात, कुछ लोग अपने सरनेम से परेशान हैं। जबकि सरनेम की कोई अहमियत नहीं होती। वास्तविक नाम ही इंसान की असली पहचान होता है। अतः सरकार को चाहिए कि हिंदुस्तान की 90% जनता, जो अंग्रेज़ी में काम करना नहीं जानती, उसे ध्यान में रखते हुए वोटर लिस्ट भारतीय राष्ट्रभाषा हिंदी में ही रखी जाए और भारत के सभी कार्य, जो भारत में किए जाते हैं, वे राष्ट्रभाषा हिंदी में ही किए जाने चाहिए।
जबकि भारत देश “वसुधैव कुटुम्बकम्” का अनुयायी है, जो पूरे विश्व को अपना परिवार मानता है। लेकिन यहाँ तो अपने ही शासक उन लोगों से भारतीय होने का प्रमाण माँग रहे हैं, जिनके पूर्वजों ने 90 वर्षों तक लाठियों खाई, गोलियाँ खाई, जेलों में सड़े, फॉसियों पर लटके और देश को आजाद कराया। आज़ादी के 80 वर्ष बाद भी उन्हीं लोगों से भारतीय नागरिकता का प्रमाण BLO के माध्यम से माँगा जा रहा है, जो गलत है।
जबकि यह कार्य क्षेत्रीय लेखपाल, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी एवं इंटर कॉलेज के शिक्षकों में से उन लोगों से भी कराया जाना चाहिए, जिनकी लिखावट अच्छी हो तथा जो हिंदी-अंग्रेज़ी अनुवाद और स्पेलिंग को अच्छी तरह समझकर कार्य करने में सक्षम हों, ताकि उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सके। flee 12-8-26


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