September 15, 2026

Naval Times News

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“शोध की आधारभूत अवधारणाओं” पर संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का हुआ आयोजन

श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय (SDSUV) व स्पीकिंगक्यूब ऑनलाइन मेंटल हेल्थ कंसल्टिंग फाउंडेशन, देहरादून के सहयोग से सोमवार, 14 सितंबर, 2026 को “शोध की आधारभूत अवधारणाएँ” विषय पर एक संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) का आयोजन किया। कार्यक्रम का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से शाम 6:30 बजे से रात 9:00 बजे तक किया गया।

इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शोध के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना, शोध पद्धति संबंधी समझ को सुदृढ़ करना तथा उद्देश्यपूर्ण एवं सार्थक अकादमिक अनुसंधान की संस्कृति को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय कुलपति, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, बादशाहथौल, टिहरी गढ़वाल, प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने शोध के व्यापक उद्देश्य एवं मूल भावना पर चर्चा की तथा भारत में शोध की वर्तमान स्थिति पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने अकादमिक शोध की गुणवत्ता, प्रासंगिकता एवं व्यावहारिक उपयोगिता को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अपने संबोधन ने संकाय सदस्यों एवं पीएचडी शोधार्थियों को स्पष्ट उद्देश्य, शोध में कठोरता तथा उपयोगी परिणाम प्राप्त करने की प्रतिबद्धता के साथ अनुसंधान कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

अपने स्वागत संबोधन में डॉ. दीपिका चमोली शाही ने आयोजनकर्ता संस्थाओं का परिचय दिया तथा संकाय विकास कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने संकाय सदस्यों एवं पीएचडी शोधार्थियों के बीच शोध की आधारभूत समझ को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शोध ज्ञान के सृजन, सामाजिक चुनौतियों के समाधान तथा अकादमिक एवं व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने ज्ञान के आदान-प्रदान एवं शोध क्षमता निर्माण के लिए ऐसे सहयोगात्मक शैक्षणिक कार्यक्रमों के महत्व को भी रेखांकित किया।

कार्यक्रम में प्रो. एम. एस. रावत, निदेशक, पं. ललित मोहन शर्मा परिसर, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, ने संरक्षक के रूप में सहभागिता की। उनकी उपस्थिति ने अकादमिक गतिविधियों एवं शोध-उन्मुख पहलों को प्राप्त संस्थागत समर्थन को दर्शाया।

प्रो. (डॉ.) गुलशन कुमार ढींगरा, वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं आईक्यूएसी के निदेशक, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ने अपने संबोधन में शोध पद्धति पर संकाय विकास कार्यक्रम आयोजित करने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों को शोध के सिद्धांतों, विभिन्न शोध पद्धतियों तथा व्यवस्थित अनुसंधान प्रक्रिया की समुचित समझ प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. (डॉ.) रीता कुमार, मनोवैज्ञानिक एवं क्लिनिकल हिप्नोथेरेपिस्ट, वरिष्ठ प्रोफेसर, AIPS, एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा तथा सलाहकार, स्पीकिंगक्यूब, ने संकाय विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शोध अभिरुचि एवं अकादमिक उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों को बौद्धिक जिज्ञासा, अकादमिक अनुशासन तथा निरंतर सीखने की भावना के साथ शोध कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. बृज मोहन शर्मा ने शोध को प्रकाशन तक सीमित न रखने का आह्वान किया, डॉ. शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि शोध को केवल शोध-पत्रों के प्रकाशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए I

उद्घाटन कार्यक्रम के पश्चात “शोध की आधारभूत अवधारणाएँ” विषय पर अकादमिक सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का संचालन प्रो. (डॉ.) रीता कुमार, मनोवैज्ञानिक एवं क्लिनिकल हिप्नोथेरेपिस्ट तथा वरिष्ठ प्रोफेसर, AIPS, एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा, द्वारा किया गया। प्रो. कुमार ने शोध को एक व्यवस्थित प्रक्रिया के रूप में समझने के महत्व पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य ज्ञान का सृजन करना, प्रचलित धारणाओं का परीक्षण करना तथा विशिष्ट शोध समस्याओं का समाधान खोजना है।

कार्यक्रम का समापन सुश्री स्नेहा भारद्वाज, एचआर एवं कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, स्पीकिंगक्यूब ऑनलाइन मेंटल हेल्थ कंसल्टिंग फाउंडेशन, देहरादून, द्वारा प्रस्तुत औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।उन्होंने माननीय कुलपति, संरक्षक, विशिष्ट सलाहकारों, विषय विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों, शोधार्थियों, आयोजन समिति के सदस्यों तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति उनकी गरिमामयी उपस्थिति एवं सहयोग के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।

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