January 13, 2026

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माता सीता की विदाई का प्रसंग, त्याग,कर्तव्य और संस्कार का अनुपम उदाहरण-आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी

हरिद्वार,बीएचईएल,10 जनवरी 2026: सनातन ज्ञानपीठ शिव मंदिर सेक्टर 1 भेल् रानीपुर हरिद्वार प्रांगण में लगातार चली आ रही 57 वीं श्री राम जानकी कथा के छठवें दिवस की कथा में परम पूज्य आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी महाराज जी ने माता सीता की विदाई का प्रसंग सुनाया। जो की रामायण के सबसे भावुक क्षणों में से एक है ये केवल एक बेटी की विदाई नही बल्कि त्याग,कर्तव्य ओर संस्कार का अनुपम उदाहरण है।

व्यास जी ने बताया कि जब राजा जनक अपने प्राणों से प्रिय पुत्री सीता जी को राम के साथ अयोध्या के लिए विदा करने लगे तो पूरा मिथिला नगर शौक मे डूब गया।जिन्हें विदेह(देह के मोह से मुक्त) कहा जाता था उनकी आंखों से भी अश्रुधारा बह निकली।गुरु जी ने बताया की सीता जी के वियोग में पशु-पक्षी भी व्याकुल हो गये थे।विदाई के समय राजा जनक ने सीता जी को गृहस्थ धर्म की शिक्षा देते हुए कहा कि अब तुम्हारा नया घर अयोध्या है।उन्होने कहा की

​माता कौशल्या और अन्य माताओं की सेवा अपनी माँ की तरह ही करना,सुख और दुःख दोनों में छाया की तरह श्री राम के साथ रहना।

​ऐसा आचरण करना जिससे राजा जनक और राजा दशरथ के दोनों कुलों का नाम उज्ज्वल हो। और उनकी मर्यादा बनी रहे।

कथा व्यास जी ने बताया की सत्संग के दृष्टिकोण से सीता जी की विदाई इस बात का प्रतीक है कि बेटी दूसरे घर की अमानत होती है। वह अपने साथ मायके के संस्कार लेकर जाती है और ससुराल को स्वर्ग बनाती है। सीता जी का धैर्य और मर्यादा हमें सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी अपने धर्म और शांति को नहीं छोड़ना चाहिए।

कथा मे मंदिर सचिव ब्रिजेश कुमार शर्मा और मुख्य यजमान जे.पी. अग्रवाल,मंजू अग्रवाल,पुलकित अग्रवाल,सुरभि अग्रवाल,दिलीप गुप्ता हरिनारायण त्रिपाठी,तेज प्रकाश, अनिल चौहान,मानदाता, राकेश मालवीय,रामकुमार,मोहित तिवारी, आदित्य गहलोत,ऋषि, सुनील चौहान,होशियार,जय प्रकाश,राजेंद्र प्रसाद, दिनेश उपाध्याय, रामललित गुप्ता,अवधेश पाल, रजनीश, अर्जुन चौहान, आर.सी. अग्रवाल, शिव प्रकाश,मधु सूदन चौहान,अलका शर्मा,संतोष चौहान, पुष्पा गुप्ता,नीतू गुप्ता,अंजू पंत,अनपूर्णा,सुमन, विभा गौतम, बृजेलेश, दीपिका,कौशल्या, सरला शर्मा,राजकिशोरी मिश्रा,मनसा मिश्रा, सुनीता चौहान,बबिता,मीनाक्षी और अनेको श्रोता गण कथा के दौरान सम्मिलित रहे।

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