February 18, 2026

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कोटा: राजकीय कला कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने किया केशवराय पाटन का शैक्षणिक भ्रमण

देवेंद्र सक्सेना,कोटा:  राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, कोटा की इतिहास, चित्रकला एवं भूगोल विषय की छात्राओं को कल दिनांक 16 फरवरी 2026 को शैक्षणिक भ्रमण हेतु केशवराय पाटन, बूंदी ले जाया गया।

केशवराय पाटन (बूंदी, राजस्थान) चंबल नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख प्राचीन तीर्थ स्थल है, जो भगवान विष्णु (केशवरायजी) के भव्य मंदिर, जैन मंदिरों की स्थापत्य कला और प्राकृतिक घाटों के लिए प्रसिद्ध है। छात्राओं ने यहां राजस्थान के इतिहास, स्थापत्य कला, प्राकृतिक और भौगोलिक संरचनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

केशवराय पाटन का प्रमुख पर्यटन स्थल है केशवराय मंदिर। 17वीं सदी का यह मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। यह चंबल नदी के किनारे एक टीले पर स्थित है। साथ ही यहाँ स्थित दिगंबर जैन मंदिर 2500 वर्ष से अधिक प्राचीन है, यह मंदिर अपनी अद्भुत मूर्तिकला के लिए जाना जाता है।

महाविद्यालय की इतिहास विषय की आचार्य डॉ. बबीता सिंघल ने छात्राओं को बताया कि केशवराय मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल है। इसका निर्माण बूंदी के शासक राव राजा छत्रसाल हाड़ा ने 1641 ईस्वी में करवाया था, लेकिन यह स्थान इससे भी प्राचीन है और पूर्व में यहाँ के मंदिर के गिरने के बाद नया निर्माण हुआ। यह मंदिर अपनी बेजोड़ वास्तुकला, बारीक नक्काशी और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। इतिहास विषय की छात्राओं ने मंदिर की ऐतिहासिक विशेषताओं से प्रभावित होकर फोटोग्राफी की एवं इससे संबंधित रिपोर्ट तैयार की।

महाविद्यालय की चित्रकला विषय की सहायक आचार्य डॉ. प्रियंका वर्मा ने छात्राओं को बताया कि प्रसिद्ध केशवराय मंदिर मध्यकालीन राजपूत स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट और बेजोड़ उदाहरण है। चंबल नदी के तट पर स्थित यह विशाल मंदिर मुख्य रूप से पत्थर की नक्काशी, सुंदर शिखर, गर्भगृह और पौराणिक आकृतियों से सजाया गया है, जो राजस्थान की पारंपरिक शिल्प कौशल को दर्शाता है।

चित्रकला विषय की छात्राएं मंदिर की बाहरी दीवारों और स्तंभों पर की गई अत्यंत बारीक नक्काशी से बहुत प्रभावित हुई और उन्होंने मंदिर में उत्तकिर्ण भगवान विष्णु (केशवराय) की पौराणिक कथाओं, भागवत कथाओं, विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं, पशु-पक्षियों और पुष्प पैटर्नों की मूर्तियों के रेखा चित्र निर्मित किए। छात्राओं ने मंदिर के गर्भग्रह में विराजमान भगवान विष्णु की श्वेत वर्ण की पद्मासन मुद्रा की प्रतिमा के दर्शन किए।

छात्राओं ने केशवराय पाटन स्थित प्राचीन दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र भगवान मुनिसुव्रतनाथ को समर्पित मंदिर का भी भ्रमण किया। लगभग 2500 वर्ष से अधिक पुरानी (चतुर्थ कालीन) गहरे हरे रंग की मनोहारी प्रतिमा चंबल नदी के तट पर स्थित इस मंदिर के भूमिगत तहखाने में विराजमान है।

यह मंदिर 1601 ईस्वी में पुनर्निर्मित किया गया। मंदिर का तहखाना 16 सुंदर नक्काशीदार स्तंभों पर टिका है। मुख्य मंदिर के अलावा, यहां भगवान महावीर और अन्य तीर्थंकरों की मूर्तियां भी हैं, जिसमें 13वीं शताब्दी की मूर्तियां भी शामिल हैं। यहां पर भी छात्राओं ने रेखाचित्र निर्मित किए, फोटोग्राफी की एवं रिपोर्ट तैयार की।

केशवराय पाटन भौगोलिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। महाविद्यालय के भूगोल विषय के सह आचार्य डॉ. जितेश जोशी ने छात्राओं को बताया कि केशवराय पाटन में चम्बल नदी की भौगोलिक संरचना मुख्य रूप से उपजाऊ जलोढ़ मैदान और चट्टानी किनारों का मिश्रण है।

यह क्षेत्र चम्बल के बीहड़ों की शुरुआत से पहले का मैदानी हिस्सा है, जहाँ नदी का पाट चौड़ा है और घाटियों के किनारे धार्मिक स्थलों के निर्माण हेतु विंध्यन बलुआ पत्थर से निर्मित हैं।

उन्होंने बताया नदी यहाँ उत्तरी-पूर्वी दिशा में बहती है और यहाँ के तट पर मिट्टी के कटाव (Soil erosion) के संकेत भी मिलते हैं, जो चम्बल की विशिष्टता है। भूगोल विषय की छात्राओं ने यहां के चंबल नदी के चौड़े घाट और तट पर शांत रूप से बहती चम्बल नदी के फोटोग्राफ लिए, यहाँ की भू संरचना का गहन निरीक्षण किया और रिपोर्ट तैयार की। छात्राओं ने यहां स्थित राजराजेश्वर मंदिर के दर्शन भी किए।

छात्राओं के लिए यह शैक्षणिक भ्रमण बहुत ही शिक्षाप्रद एवं लाभकारी रहा, उन्हें यहां राजस्थान के इतिहास, कला, संस्कृति और भौगोलिक संरचना की बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

इस शैक्षणिक भ्रमण में छात्राओं का मार्गदर्शन डॉ. बबीता सिंघल, डॉ. जितेश जोशी एवं डॉ. प्रियंका वर्मा ने किया, साथ ही प्रयोगशाला सहायक सुश्री आशिमा सिंह, सुश्री मानसी एवं सहायक कर्मचारी श्री लक्ष्मी चंद भी छात्राओं की सहायता हेतु उपस्थित रहे।

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