July 17, 2026

Naval Times News

निष्पक्ष कलम की निष्पक्ष आवाज

हरिद्वार: धनौरी पी.जी. कॉलेज में विश्व दर्शन दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

हरिद्वार: धनौरी पी.जी. कॉलेज, धनौरी (हरिद्वार) में हिंदी विभाग द्वारा विश्व दर्शन दिवस के उपलक्ष्य में दिनांक 25 मार्च, 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय भारतीय ज्ञान परंपरा और निर्गुण संतों का दार्शनिक पक्ष विषय रहा, जो कि एक भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR), नई दिल्ली, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संपोषित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके और महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत करके की गई।

संगोष्ठी की शुरुआत संगोष्ठी के मुख्य संरक्षक और सचिव श्री आदेश कुमार जी के आशीर्वचनों से हुई। उन्होंने अपने उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह हमारी संस्कृति, मूल्यों एवं जीवन-दर्शन की आधारशिला है।

संगोष्ठी के निदेशक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विजय कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारे जीवन में नैतिक मूल्यों को स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, जो समाज को सुदृढ़ बनाती है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री गिरीश अवस्थी जी (पूर्व कुलसचिव, उत्तराखंड संस्कृत महाविद्यालय) ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा मानव जीवन में समर्पण, भक्ति, भाव एवं आध्यात्मिकता जैसे गुणों का विकास करती है।

मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. मुक्तिनाथ यादव जी ने अपने व्याख्यान में IKS (Indian Knowledge System) के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए प्राचीन सभ्यताओं, बौद्ध दर्शन एवं बौद्ध साहित्य के महत्व को विस्तार से समझाया। विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. रजत अग्रवाल जी (आईआईटी, रुड़की) ने अपने संबोधन में अर्थव्यवस्था को IKS से जोड़ते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विशिष्ट वक्ता डॉ. उमेश कुमार शुक्ल जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए विशेष रुप से ‘भाव’ के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल तत्व बताया।

संरक्षक के रूप में डॉ. इवांशु सैनी (Director, Prithvi Singh Viksit College) की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। संगोष्ठी के मुख्य संयोजक डॉ. गौरव कुमार मिश्र सहायक आचार्य, हिंदी विभाग रहे, जिनके कुशल निर्देशन एवं समन्वय से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अरविंद कुमार श्रीवास्तव जी द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गौरव कुमार मिश्र जी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

संगोष्ठी के अंत में आयोजन समूह के सदस्यों को प्रतीक चिह्न प्रदान करके उनकी सम्मानित किया गया। सह-संयोजक के रूप में डॉ. गुड्डी चमोली एवं डॉ. रोमा, आयोजन सचिव डॉ. अर्पित, तथा आयोजन सह-सचिव डॉ. संदीप कुमार एवं डॉ. शौर्यादित्य का विशेष योगदान रहा।

अंत में सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया गया तथा कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ।

About The Author

You may have missed