महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय, नानकमत्ता के प्रांगण में IQAC के तत्वावधान में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के सुअवसर पर 2026 की आधिकारिक थीम “प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना” (Unlocking the Potential of Administrative Data) पर आधारित एक अत्यंत ज्ञानवर्धक और विस्तृत शैक्षणिक संगोष्ठी एवं दीर्घ व्याख्यान माला का सफल आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम भारत के महान वैज्ञानिक और सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस (Prof. P.C. Mahalanobis) की जयंती और देश के विकास में उनके अभूतपूर्व योगदान को याद करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर ललित तिवारी (विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान विभाग, डी० एस० बी० परिसर नैनीताल) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर ललित तिवारी ने एक अत्यंत विस्तृत, व्यावहारिक और शोध-परक दीर्घ व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने संबोधन को तीन मुख्य भागों में विभाजित कियाः सांख्यिकी का इतिहास, प्रोफेसर पी.सी. महालनोबिस का योगदान, और आधुनिक वैश्विक परिदृश्य में सांख्यिकी की भूमिका। प्रोफेसर तिवारी ने अपने व्याख्यान की शुरुआत करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि भारत सरकार हर साल 29 जून को प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस के जन्मदिन को ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस’ के रूप में मनाती है।
उन्होंने विस्तार से समझाया कि कैसे प्रो. महालनोबिस ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना की और स्वतंत्र भारत की द्वितीय पंचवर्षीय योजना (Second Five-Year Plan) का खाका तैयार किया, जिसे ‘महालनोबिस मॉडल’ भी कहा जाता है।
उन्होंने रेखांकित किया कि कैसे औद्योगीकरण और आर्थिक विकास की मजबूत नींव रखने में सांख्यिकीय मॉडलों का उपयोग किया गया था। प्रोफेसर ललित तिवारी ने बहुत ही सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से छात्रों को समझाया कि सांख्यिकी हमारे दैनिक जीवन से कैसे जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा- सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, एक आम इंसान से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों और देशों की सरकारें अनजाने में या जानबूझकर सांख्यिकी का ही उपयोग करती हैं। मौसम के पूर्वानुमान से लेकर, शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, कृषि उत्पादन के आंकलन, और महामारी के नियंत्रण तक- हर जगह डेटा का विश्लेषण ही काम आता है।
उन्होंने छात्रों को आगाह किया कि जिसके पास सही डेटा और उसका विश्लेषण करने की सांख्यिकीय क्षमता है, वही भविष्य के वैश्विक बाजार और अनुसंधान के क्षेत्र में नेतृत्व करेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के सम्मानित प्राचार्य प्रोफेसर नवीन भगत द्वारा की गई। प्राचार्य प्रो. नवीन भगत ने कहा कि वर्तमान में केवल सांख्यिकी या गणित के छात्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक विज्ञान, मानविकी, वाणिज्य और प्रबंधन के छात्रों के लिए भी सांख्यिकी का बुनियादी ज्ञान होना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई छात्र भविष्य में सिविल सेवा, बैंकिंग, डेटा साइंटिस्ट, बिजनेस एनालिस्ट, या किसी भी प्रकार के शोध (Research) में जाना चाहता है, तो सांख्यिकी के बिना उसकी राह अधूरी है।
समग्र कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालय के विद्यार्थियों के भीतर सांख्यिकी, डेटा विश्लेषण, और अनुसंधान (Research Methodology) के प्रति गहरी रुचि जागृत करना था। आज के सूचना और प्रौद्योगिकी के युग में डेटा का क्या महत्व है, इस विषय पर युवाओं को जागरूक करना इस संगोष्ठी का मूल एजेंडा रहा। कार्यक्रम में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय के कुल 42 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया, जिन्होंने पूरे सत्र में अनुशासन और सक्रियता के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. नवीन भगत, वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. मृत्युंजय शर्मा, डॉ. ममता सुयाल, डॉ. मंजुलता जोशी, डॉ. आशा गढ़िया, डॉ. रवि जोशी तथा विपिन थापा, राम जगदीश सिंह, सुनील कुमार, मुस्कान राणा, नवजोत कौर, रेनू जोशी भी उपस्थित थे।
विचार गोष्ठी का संचालन IQAC कोऑर्डिनेटर डॉ. ममता सुयाल द्वारा किया गया।


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