हरिद्वार, 24 अक्टूबर: भारतीय किसान यूनियन (अंबावता) के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौधरी ने हरिद्वार जिले के कृषि भूमि पट्टाधारकों को भूमिधरी (मालिकाना) का अधिकार दिए जाने की पुरजोर मांग की है। हरिद्वार प्रैस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान संगठन ने सरकार के सामने किसानों की समस्याओं को रखा।
सरकार के ‘दोहरे मापदंड’ पर भड़के किसान: देहरादून और यूएस नगर को हक, हरिद्वार की अनदेखी क्यों?
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौधरी ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया। इस फैसले के तहत देहरादून और उधम सिंह नगर (यूएस नगर) के पट्टाधारक किसानों को तो मालिकाना हक देने का निर्णय लिया गया, लेकिन हरिद्वार के किसानों की पूरी तरह अनदेखी कर दी गई।
सुभाष चौधरी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “सरकार का यह दोहरा मापदंड किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम मुख्यमंत्री धामी से अपील करते हैं कि हरिद्वार जनपद के किसानों को भी समान रूप से मालिकाना हक दिया जाए, ताकि वे सम्मान के साथ अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।” उन्होंने साफ किया कि किसानों के हक की इस लड़ाई में संगठन किसी भी संघर्ष से पीछे नहीं हटेगा।
1976 से काश्तकारी कर रहे एससी, एसटी और सभी वर्गों के किसान
यूनियन के नेताओं ने बताया कि वर्ष 1976 में हरिद्वार के कुतुबपुर, गढ़ मीरपुर, राजपुर, पूरनपुर, सलेमपुर, सुमन नगर और बीचपड़ी सहित कई गांवों में ग्रामीणों को कृषि भूमि के पट्टे आवंटित किए गए थे। इन पट्टाधारकों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) समेत सभी वर्गों के गरीब व जरूरतमंद किसान शामिल हैं। पट्टे मिलने के बाद से ही, यानी पिछले कई दशकों से ये किसान इस भूमि पर लगातार खेती (काश्तकारी) कर रहे हैं। ऐसे में पात्रता और नियमों के अनुसार इन्हें भूमिधरी का अधिकार मिलना ही चाहिए।
10 दिन का अल्टीमेटम: मांग पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
संगठन के महासचिव अर्जुन कर्णवाल ने भी सरकार से इस संवेदनशील विषय पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने बताया कि हरिद्वार के किसानों को उनका जायज अधिकार दिलाने के लिए जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भेजा जा रहा है।
यूनियन ने सरकार को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर इस संबंध में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो हरिद्वार के किसान सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे।



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