November 2, 2026

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ऋषिकेश कैंपस में मुखौटा नृत्य परंपरा पर कार्यशाला, न्यूज़लेटर ‘होराइजन’ का विमोचन

ऋषिकेश: श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश के अंग्रेजी विभाग द्वारा सोमवार को ‘उत्तराखंड का मुखौटा नृत्य परंपरा’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

विज्ञान-तकनीक के साथ लोक संस्कृति भी आवश्यक: कुलपति
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान व तकनीकी के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा एवं लोक संस्कृति का ज्ञान और उसका संरक्षण भी बेहद आवश्यक है। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा कार्यशाला संयोजक प्रो. हेमन्त कुमार शुक्ला द्वारा संपादित अंग्रेजी विभाग के न्यूज़लेटर “होराइजन” (Horizon) का विमोचन भी किया गया।
हजारों वर्षों से जीवित हैं हमारी लोक परंपराएं: प्रो. पुरोहित
कार्यशाला के मुख्य वक्ता प्रो. डी. आर. पुरोहित ने अपने व्याख्यान में कहा कि उत्तराखंड की लोक परंपराएं अपने भीतर विज्ञान सम्मत सिद्धांतों को समेटे हुए कई हजार वर्षों से जीवित हैं। उन्होंने बताया कि मुखौटा नृत्य की शैली पूरे गढ़वाल से लेकर कुमाऊँ के विभिन्न क्षेत्रों में सदियों से प्रचलित है।
AI के दौर में पढ़ने-लिखने की आदत डालें युवा: प्रो. विकास शर्मा
मेरठ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष व प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रो. विकास शर्मा ने कार्यशाला में बतौर आमंत्रित वक्ता शिरकत की। उन्होंने कहा कि रचनात्मक लेखन ज्ञान की सीमाओं को नया विस्तार देता है। अपने उपन्यास “ऑल हर फायर्स” (All Her Fires) की चर्चा करते हुए उन्होंने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस आधुनिक दौर में पढ़ने-लिखने की आदत को जीवंत रखना जरूरी है, साथ ही एक रचनाकार में संवेदनशीलता का होना भी अनिवार्य है।
परिसर निदेशक प्रो. महावीर रावत ने अकादमिक वातावरण को मजबूत करने के लिए ऐसी कार्यशालाओं को निरंतर आयोजित करने पर बल दिया। अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार कुकरेती ने सभी अतिथियों का आभार जताते हुए कहा कि उनका विभाग पश्चिमी साहित्य के साथ-साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर भी उच्च स्तरीय शोध करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कार्यशाला का कुशल संचालन डॉ. पारुल मिश्रा ने किया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर प्रो. वी. के. श्रीवास्तव, प्रो. परवेज अहमद, प्रो. राकेश जोशी, डॉ. सुनील प्रसाद, डॉ. दर्शन सिंह नेगी, प्रो. सी. एस. नेगी सहित शोध छात्रा दीपशिखा, इशिता, शालिनी, हिमांशु व अन्य विद्यार्थी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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