उत्तराखंड: सुरंग के मुहाने पर बाबा बौखनाग के अस्थाई मंदिर के पीछे पानी का रिसाव हुआ है। पानी के रिसाव से बनी आकृति को भगवान शंकर की आकृति बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें भगवान शिव की आकृति बनी दिखाई दी। कहना है कि अब भोलेनाथ का आशीर्वाद मिल गया है। सभी लोग सुरक्षित बाहर निकल आएंगे।
अब इसे आस्था कहें, चमत्कार कहें या फिर कुछ और लेकिन उत्तरकाशी टनल के पास भगवान् शिव की आकृति प्रकट होने से लोगों की आस्था और बढ़ गई है ग्रामीण उम्मीद लगा रहे हैं कि आप शिव प्रकट हो गए हैं अब जल्द ही 41 श्रमिक सकुशल बाहर लौट आएंगे।
15 दिन से गंगा-यमुना घाटी के ईष्ट आराध्य देवताओं को मनाने के लिए स्थानीय लोग अपने-अपने देवता की शरण में हैं। सुबह-शाम उनकी सलामती और ऑपरेशन सिलक्यारा के सफल होने की कामना की जा रही है।
स्थानीय ग्रामीण का कहना है कि गंगा घाटी के भंडारस्यूं पट्टी, दसगी पट्टी, बिष्ट पट्टी, यमुना घाटी के मुगरसंती, बड़कोट पट्टी के आराध्य देव बाबा बौखनाग हैं।
टनल के ऊपरी हिस्से पर बाबा बौखनाग का मंदिर है। हादसा होने के बाद सुरंग के प्रवेश द्वार पर भी उनका मंदिर स्थापित किया गया। स्थानीय लोग यहां डोली लेकर गए, पूजा-अर्चना की। बचाव अभियान शुरू होने से पहले उनकी पूजा-अर्चना की जा रही है।


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