कोटा : कला संस्कृति पर्यावरण प्रेमी शिक्षा विद् प्रिया सिंह से संक्षिप्त वार्ता ….
लोकगीत गूंजे हर मन में,
लोकनृत्य सजाए हरि मिलन में।
ये संस्कृति की झलक दिखाते,
भारत का गौरव बढ़ाते जगत में।
कोटा की प्रिया सिंह संस्कार मित्र संस्कार भारती के विचार:
मेरा जन्म 25 अक्टूबर को राजस्थान में माता लक्ष्मी सिहं एवं पिता श्री राजेन्द्र सिंह के यहाँ हुआ। राजकीय जानकी देवी बजाज महिला महाविद्यालय कोटा से बी एस सी तथा जयपुर से एम एस सी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।
गणित व अंग्रेजी का प्रशिक्षण देती हूं राष्ट्र हित कला संस्कृति पर्यावरण संरक्षण के लिए संकल्पित हूँ समाज सेवा में मेरे मार्गदर्शक अखिल भारतीय संस्कार भारती की विमर्श टोली के सदस्य कोटा महानगर संस्कार भारती के महामंत्री आदरणीय श्री देवेंद्र सक्सेना जी एवं मंचीय कला प्रमुख संस्कार भारती संगीत गुरू डॉ 0 संगीता सक्सेना जी के माध्यम से कला संस्कृति साहित्य सेवी संस्था संस्कार भारती की संस्कार मित्र बनी। मुझे पर्यावरण समाज काव्य पाठ में पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है ।

जनकपुरी निवासी समाज सेवी प्रिया सिंह कला को लेकर बतातीं है कि आज की आधुनिक जीवनशैली और तकनीकी युग में पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, लेकिन हमें अपनी जड़ों को भूलना नहीं चाहिए। हमें बचपन से ही बच्चों में सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए जिससे आने वाली पीढियां अपनी परंपरा कला संस्कृति पर गर्व कर सके।
लोकगीत व लोकनृत्य किसी भी संस्कृति-समाज के मुंह बोले चितेरे हैं। अभी कुछ दिनों पहले ही राजकीय कला कन्या महाविद्यालय कोटा में स्पिक मैके सांस्कृतिक मंच के तत्वावधान में उड़ीसा का एक पारंपरिक नृत्य “गोटीपुआ” आयोजित हुआ ।

जिसमें ओडिशा प्रांत से आए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरते छोटे छोटे सात बालकों ने अपनी प्रस्तुति दी,,जिससे हमें ये प्रेरणा मिलती है कि हम अभिभावकों की अपने बच्चों को किसी न किसी एक सांस्कृतिक गतिविधि का शिक्षण ज़रूर कराना चाहिए जिससे वे सिर्फ किताबी कीड़ा न बनकर उनके व्यक्तित्व का चहुंमुखी विकास कर सके।
हम सबमें से प्रत्येक की जिम्मेदारी हो कि हम अपनी संतानों को केवल जीविका उपार्जन के साधन जुटाने में ही उन्हें न धकेले अपितु उनकी रुचि इस ओर भी जागृत करें जैसे त्योहारों का सही अर्थ समझाया जाए, मातृभाषा के लिए प्रेम जागृत करना, जिससे हमारी परंपरा,रीति रिवाज,भाषा, कला व जीवन– मूल्यों में सामंजस्य स्थापित हो सके एवं उनको सुरक्षित व जीवंत रख सकें
नौजवानों उठो वक्त यह कह रहा।
खुद को बदलो जमाना बदल जायेगा।।
प्रिया सिंह
कला संस्कृति समाज पर्यावरण प्रेमी कोटा राजस्थान


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