हरिद्वार: धनौरी पी.जी. कॉलेज, धनौरी में दिनांक 27 मार्च 2026 को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के सौजन्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती वंदना के साथ गरिमामय वातावरण में हुआ।
प्राचार्य प्रो. डॉ. विजय कुमार ने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए सतत विकास, सौर ऊर्जा एवं नवीन तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। सचिव श्री आदेश कुमार जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि नई तकनीकों के माध्यम से उत्तराखंड को सतत विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जाना समय की आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथि श्री इवांशु सैनी (निदेशक, पृथ्वी सिंह विकसित ग्रुप ऑफ कॉलेजेज, धनौरी) ने शिक्षा और तकनीकी उन्नति को विकास का आधार बताया। उप-प्राचार्या डॉ. अल्का सैनी ने उत्तराखंड की समृद्ध धरोहर एवं पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हेमंत बिष्ट (परीक्षा नियंत्रक, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय) ने विश्वविद्यालय की ओर से संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु शुभकामनाएँ प्रदान कीं तथा विज्ञान एवं सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि डॉ. मनोज कुमार (एसोसिएट प्रोफेसर, गणित एवं सांख्यिकी विभाग, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार) ने नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीकों के साथ सतत विकास को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. उमेश कुमार (प्रिंसिपल साइंटिस्ट, CSIR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, देहरादून) ने Eco-friendly Materials and Chemicals विषय पर व्याख्यान देते हुए ग्रीन केमिस्ट्री एवं नवीकरणीय स्रोतों के महत्व पर प्रकाश डाला।
वहीं डॉ. हितेंद्र सिंह (SDSD, ऋषिकेश परिसर) ने बताया कि रसायन हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विद्यमान है तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली वेदों पर आधारित है।
इसके पश्चात आयोजित द्वितीय तकनीकी सत्र में विभिन्न विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए गए।
डॉ. सुशील भडूला (राजकीय डिग्री कॉलेज, वेदिखाल, पौड़ी गढ़वाल) ने “Sustainable Development in Uttarakhand” विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया।
डॉ. तरुण कुमार गुप्ता (सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर, चमनलाल डिग्री कॉलेज) ने “Scientific Application of Vedic Mathematics for Sustainable Uttarakhand” विषय पर विचार प्रस्तुत किए।
इसी क्रम में डॉ. श्रीनिवासराव नाइक बी (प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवं एसोसिएट प्रोफेसर, CBRI रुड़की, भारत) ने “Sustainable Development towards R&D Practices” विषय पर अपने व्याख्यान में अनुसंधान एवं विकास (R&D) की भूमिका को रेखांकित किया।
इस संगोष्ठी के सफल आयोजन में संयोजक डॉ. अंकुर कुमार, सह-संयोजक डॉ. सुशील कुमार, आयोजन सचिव डॉ. प्रभात कुमार एवं सह-आयोजन सचिव डॉ. आनंद प्रकाश का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा पंत एवं डॉ. कृष्णन बिष्ट द्वारा किया गया।
अंत में, महाविद्यालय के सभी सहायक आचार्यों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।
कार्यक्रम का प्रथम दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


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