संजीव शर्मा,हरिद्वार, बीएचईएल, 12 जनवरी 2026: सनातन ज्ञानपीठ शिव मंदिर सेक्टर 1 बीएचईएल, रानीपुर हरिद्वार प्रांगण मे लगातार चली आ रही 57 वीं श्री राम जानकी कथा के आठवें दिवस की कथा में परम पूज्य आचार्य महंत प्रदीप गोस्वामी महाराज जी ने राम भरत मिलाप,सीता हरण,राम सुग्रीव मिलन और बाली वध की कथा विस्तार पूर्वक सुनाई।
कथा व्यास जी ने बताया की श्री राम कथा परम भरत मिलाप एक अत्यंत भावुक क्षण है जो त्याग और भाई चारे की पराकाष्ठा को दर्शाता है।जब भरत को पता चला कि कैकेयी ने उनके लिए राज्य और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास माँगा है, तो वे ग्लानि से भरकर चित्रकूट पहुँचे।
उन्होंने राम से अयोध्या लौटने की भावुक विनती की, लेकिन राम ने ‘पितृ-वचन’ को सर्वोपरि मानकर वनवास जारी रखा। अंततः, भरत के श्री राम की चरण-पादुकाएँ सिर पर रखकर अयोध्या ले आए और उन्हें सिंहासन पर रखकर सेवक की तरह रह कर नंदिग्राम मे 14 वर्षो तक शासन किया।
कथा व्यास जी ने बताया की श्री राम कथा में सीता हरण एक निर्णायक और अत्यंत दुखद मोड़ है। यह प्रसंग रावण के विनाश और लंका युद्ध की आधारशिला रखता है।पंचवटी में निवास के दौरान, रावण ने अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए रावण मामा मारीच को स्वर्ण मृग (सोने का हिरण) बनाकर भेजा। माता सीता उस मृग पर मोहित हो गईं और श्री राम उसे पकड़ने निकल पड़े। लक्ष्मण भी राम की सहायता हेतु गए, पर जाने से पहले उन्होंने सीता की रक्षा के लिए ‘लक्ष्मण रेखा’ खींची।तभी रावण ने साधु का वेष धारण कर भिक्षा माँगी। जैसे ही सीता माता ने रेखा से बाहर कदम रखा, रावण उन्हें बलपूर्वक अपने विमान में बिठाकर ले गया। रास्ते में जटायु ने उन्हें बचाने का प्रयास किया,पर वो सीता को बचाने मे नाकाम रहे अंततः रावण ने सीता माता को लंका के अशोक वाटिका में बंदी बना लिया।
कथा व्यास जी ने बताया की माता सीता जी की खोज के दौरान हनुमान जी ने ऋष्यमूक पर्वत पर श्री राम की मित्रता सुग्रीव से कराई। सुग्रीव ने अपनी व्यथा सुनाई कि उसके भाई बाली ने उसका राज्य और पत्नी छीन ली है। राम ने अग्नि को साक्षी मानकर सुग्रीव की सहायता का वचन दिया।इसके पश्चात, राम ने एक ही बाण से अत्याचारी बाली का वध किया और सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया। बदले में सुग्रीव ने सीता माता की खोज के लिए वानर सेना भेजी।
महाराज जी ने संदेश दिया कि राम कथा केवल कहानी नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है, जो हमें अधर्म पर धर्म की विजय का मार्ग दिखाती है।
कथा मे मंदिर सचिव ब्रिजेश कुमार शर्मा और मुख्य यजमान जे.पी. अग्रवाल,मंजू अग्रवाल,पुलकित अग्रवाल,सुरभि अग्रवाल,दिलीप गुप्ता हरिनारायण त्रिपाठी,तेज प्रकाश, अनिल चौहान,मानदाता, राकेश मालवीय,रामकुमार,मोहित तिवारी, आदित्य गहलोत, ऋषि, सुनील चौहान,होशियार,जय प्रकाश,राजेंद्र प्रसाद,दिनेश उपाध्याय, रामललित गुप्ता,अवधेश पाल,शरद रजनीश,आर.सी. अग्रवाल, अलका शर्मा,संतोष चौहान,पुष्पा गुप्ता,नीतू गुप्ता,अंजू पंत,सुमन, अनपूर्णा, विभा गौतम,बृजेलेश,दीपिका, कौशल्या, सरला शर्मा, राजकिशोरी मिश्रा,मनसा मिश्रा, सुनीता चौहान,बबिता,मीनाक्षी शालू पांडे और अनेको श्रोता गण कथा के दौरान सम्मिलित रहे।


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