February 17, 2026

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजेन्द्र बहादुर सिंह की 20 वीं पुण्यतिथि पर दी गईं भावपूर्ण श्रद्धांजलियां

हरिद्वार: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजेन्द्र बहादुर सिंह की 20वीं पुण्यतिथि पर श्री महाकालेश्वर महादेव मन्दिर प्रज्ञाकुञ्ज जगजीतपुर में प्रेरणादायी वातावरण में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई।

श्रद्धांजलि सभा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भारत भूषण विद्यालंकार, स्थानीय विधायक आदेश चौहान, आचार्य करुणेश मिश्रा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि तथा गणमान्य नागरिक शामिल हुए। संगठन के अध्यक्ष देशबन्धु ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्री राजेन्द्र बहादुर सिंह का परिचय देते हुए बताया कि वे गांधीजी की असीम अनुकम्पा के पात्र रहे हैं, उनके पास गांधीजी के हस्तलिखित पत्र उनकी निकटता का परिचय देते हैं।

स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति (रजि.) के राष्ट्रीय महासचिव तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के पुत्र जितेन्द्र रघुवंशी ने अपने पिता जी के जीवन परिचय तथा स्वतंत्रता आन्दोलन में भागीदारी का उल्लेख करते हुए बताया कि पिताजी का जन्म 11 अगस्त 1911 को चित्रकूट के पावन आंचल ग्राम पिंडरा जागीरदार पिता स्वर्गीय श्री दुर्गा प्रसाद सिंह तथा माता श्रीमती सुखदेव देवी के घर में हुआ। विंध्याचल और कामदगिरि की बीहड़ पहाड़ियां अंग्रेजों के दमनकारी प्रकोपों से स्वाधीनता सेनानियों को छुपाने के लिए सुरक्षित जगह थी़।

सन 1930 में ही राजेन्द्र बहादुर सिंह के नेतृत्व में महावीर दल का गठन हुआ, जो गांधी जी की विचारधारा का प्रचार प्रसार करता था। दिसंबर 1930 में आपके साथ एक प्रतिनिधि मंडल सत्याग्रह में शामिल होने के लिए आगरा, दिल्ली तथा अजमेर गया। श्री राजेन्द्र बहादुर सिंह ने राज्य की कामना की अपेक्षा स्वतंत्रता को अपना इष्ट माना और वर्धा आश्रम चले गए, जहां सन 1936 से 1938 तक आश्रम की गतिविधियों के संचालन में श्री महादेव भाई जैसे वरिष्ठ स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संरक्षण में सेवारत रहे।

इस बीच पयस्वनी नदी के तट त्रिवेणी घाट पर 14 जनवरी 1938 को कांग्रेस का अधिवेशन रखा गया, जिसकी व्यवस्था की जिम्मेदारी पिताजी को सौंपी गई, नवंबर 1938 में चित्रकूट में प्रजा परिषद का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष श्री गोदीन शर्मा बनाए गए। उन्होंने बताया कि हमारे बाबाजी स्व. श्री दुर्गा प्रसाद सिंह जी की चारों संतानें श्री रघुवंश प्रताप सिंह, श्री चक्रपाल सिंह, श्री दिग्विजय सिंह तथा तथा हमारे पिताजी श्री राजेन्द्र बहादुर सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

इस बीच परिवार का दबाव विवाह के लिए बढ़ रहा था, किन्तु स्वाधीनता की लड़ाई कमजोर न पड़े इसके लिए पिताजी वैवाहिक बंधन में नहीं बंधना चाह रहे थे। समय-समय पर पत्राचार के माध्यम से गांधी जी का मार्गदर्शन लेते रहते थे, अतः अपने विवाह न करने के निश्चय की भी जानकारी गांधीजी को दी। जिसके जवाब में गांधी जी ने लिखा कि विवाह करना कोई अपराध नहीं है, संभव है कि जीवनसाथी का सहयोग मिले और गतिविधियों को और भी गति मिले। संयोग से खोही जागीरदार श्री अवध बिहारी सिंह की पुत्री सत्यवती देवी भी अपने पिता के साथ स्वाधीनता की ज्योति प्रज्वलित कर रही थीं, 1943 में आप दोनों वैवाहिक बंधन में बंध गए। सन 1945 में श्री राजेन्द्र बहादुर सिंह के नेतृत्व में प्रजा मंडल की स्थापना हुई, इसके सदस्यों ने असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और गिरफ्तारियां दीं।
पिताजी ने सन 2006 की महाशिवरात्रि के पावन पर्व के दूसरे दिन अपने निवास प्रज्ञाकुंज, जगजीतपुर, हरिद्वार में अंतिम सांस ली, जहां कनखल श्मशान घाट में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ आपका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
श्रद्धांजलि सभा के पश्चात प्रतिवर्ष की भांति महाशिवरात्रि का भण्डारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया, जिसमें स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के सर्व श्री प्रभाश मिश्रा, कैलाश चन्द वैष्णव जी, वीरेंद्र गहलोत जी, डा. वेद प्रकाश आर्य, जोगिंद्र सिंह तनेजा, सुरेन्द्र छाबड़ा, विवेक कुमार शर्मा, वी एन चौधरी, राम बाबू कुशवाहा, नरेन्द्र कुमार वर्मा, अनुराग सिंह गौतम, आदित्य गहलोत, प्रमेश चौधरी, चन्द्र प्रकाश मगन, अनुज गुप्ता, बृजेश सिंह, सतपाल सिंह, सत्यवीर सिंह, पुनीत श्रीवास्तव, दीपक कुमार, अवतार सिंह, सतेन्द कुमार, स्वाती गुप्ता, श्रीमती शीला सिंह, कमला देवी, आशा रघुवंशी, गीता देवी गुप्ता, निशा सिंह कुशवाहा, पूनम शैलेन्द्र सिंह, पूनम बृजेश सिंह सहित अन्य भाई बहनों ने भी प्रसाद वितरण में सराहनीय सहयोग प्रदान किया।

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