नवल टाइम्स: स्पीकिंगक्यूब ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य परामर्श फाउंडेशन ने श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के सहयोग से 14 से 26 सितंबर 2026 तक “अनुसंधान पद्धति एवं अकादमिक प्रकाशन” विषय पर संकाय विकास कार्यक्रम का आयोजन किया।
यह कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें संकाय सदस्यों, पीएचडी शोधार्थियों, शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को अनुसंधान के विभिन्न चरणों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। इसमें अनुसंधान की आधारभूत अवधारणाओं, अनुसंधान अभिकल्प, आंकड़ा संग्रहण, आंकड़ा विश्लेषण, अनुसंधान उपकरणों के प्रयोग, अकादमिक लेखन, शोध प्रकाशन, पुस्तक प्रस्ताव लेखन तथा अनुसंधान नैतिकता जैसे विषयों को शामिल किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन समारोह से हुआ, जिसकी मेजबानी सुश्री स्नेहा भारद्वाज, परामर्श मनोवैज्ञानिक एवं मानव संसाधन, स्पीकिंगक्यूब ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य परामर्श फाउंडेशन ने की। कार्यक्रम में प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन, माननीय कुलपति, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय संरक्षक के रूप में उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में प्रो. (डॉ.) दीपिका चमोली शाही, संस्थापक एवं निदेशक, स्पीकिंगक्यूब; डॉ. बृज मोहन शर्मा; प्रो. (डॉ.) गुलशन कुमार ढींगरा; प्रो. (डॉ.) रीता कुमार तथा प्रो. एम.एस. रावत सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों में अनुसंधान से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। प्रो. (डॉ.) रीता कुमार ने अनुसंधान की आधारभूत अवधारणाओं पर सत्र लिया। इसके बाद प्रो. (डॉ.) दीपिका चमोली शाही ने गुणात्मक अनुसंधान अभिकल्प पर जानकारी दी। प्रो. (डॉ.) तमन्ना सक्सेना ने मात्रात्मक एवं मिश्रित-पद्धति अनुसंधान अभिकल्प पर सत्र लिया, जबकि प्रो. (डॉ.) स्मृति सेठी ने आंकड़ा संग्रहण तकनीकों पर प्रतिभागियों को जानकारी प्रदान की।
इसके बाद कार्यक्रम में आंकड़ा विश्लेषण से जुड़े व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। प्रो. (डॉ.) निशा कौशिक ने जामोवी के माध्यम से आंकड़ा विश्लेषण पर प्रशिक्षण दिया। इसके बाद प्रो. (डॉ.) मोहम्मद अमीन वानी ने एसपीएसएस के माध्यम से आंकड़ा विश्लेषण पर सत्र लिया। प्रो. (डॉ.) दिग्विजय पांडे एवं प्रो. (डॉ.) बिनय कुमार पांडे ने संयुक्त रूप से मैटलैब के माध्यम से आंकड़ा विश्लेषण पर प्रशिक्षण दिया। प्रो. (डॉ.) काजल, सहायक प्राध्यापक, आईएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय, देहरादून ने स्मार्टपीएलएस के माध्यम से आंकड़ा विश्लेषण पर सत्र आयोजित किया।
कार्यक्रम के नौवें दिन अनुसंधान में प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। प्रो. (डॉ.) दिग्विजय पांडे एवं प्रो. (डॉ.) बिनय कुमार पांडे ने अनुसंधान एवं अकादमिक लेखन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों को कन्सेंसस, पर्प्लेक्सिटी, मेंडेली, एंडनोट और ज़ोटेरो जैसे उपकरणों के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
दसवें दिन प्रो. (डॉ.) निधि वर्मा, प्रोफेसर, एमिटी विश्वविद्यालय, गुरुग्राम ने शोध प्रकाशन प्रक्रिया एवं उपयुक्त शोध पत्रिका के चयन पर सत्र लिया। प्रतिभागियों को शोध प्रकाशन की प्रक्रिया तथा उपयुक्त पत्रिका के चयन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी गई।
ग्यारहवें दिन प्रो. (डॉ.) दिग्विजय पांडे एवं प्रो. (डॉ.) बिनय कुमार पांडे ने स्कोपस-सूचीबद्ध प्रकाशकों के लिए पुस्तक प्रस्ताव लेखन पर सत्र आयोजित किया। सत्र में पुस्तक प्रस्ताव की संरचना, तैयारी तथा शोध कार्य को अकादमिक प्रकाशकों के समक्ष प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के बारहवें और अंतिम दिन समापन समारोह का आयोजन किया गया, जिसकी मेजबानी सुश्री काजल तोमर, परामर्श मनोवैज्ञानिक, स्पीकिंगक्यूब ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य परामर्श फाउंडेशन ने की। उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत किया और अंतिम अकादमिक सत्र के लिए प्रो. (डॉ.) आहाना साहा, सहायक प्राध्यापक, गीतम विश्वविद्यालय, हैदराबाद को आमंत्रित किया। उन्होंने “अनुसंधान नैतिकता एवं अकादमिक सत्यनिष्ठा” विषय पर सत्र लिया।
प्रो. (डॉ.) आहाना साहा ने अनुसंधान में नैतिक प्रक्रियाओं, अकादमिक ईमानदारी, अनुसंधान की सत्यनिष्ठा तथा जिम्मेदार अनुसंधान व्यवहार के महत्व पर चर्चा की। सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को अनुसंधान प्रक्रिया में नैतिक मानकों और विश्वसनीयता बनाए रखने के महत्व की जानकारी मिली।
इसके बाद सुश्री काजल तोमर ने स्पीकिंगक्यूब की मानसिक स्वास्थ्य सहायता को अधिक सुलभ बनाने की नई पहल Cube AI के बारे में जानकारी दी। Cube AI एक मानसिक स्वास्थ्य चैटबॉट है, जो उपयोगकर्ताओं को भावनात्मक सहयोग, आत्म-चिंतन तथा मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित मार्गदर्शन के लिए एक डिजिटल माध्यम प्रदान करता है।
इसके बाद सुश्री काजल तोमर ने सुश्री स्नेहा भारद्वाज को अंतिम धन्यवाद ज्ञापन के लिए आमंत्रित किया। सुश्री स्नेहा भारद्वाज ने कार्यक्रम के संरक्षक प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन, माननीय कुलपति, श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के प्रति उनके सहयोग एवं प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया।
उन्होंने आयोजन समिति के सदस्यों प्रो. (डॉ.) दीपिका चमोली शाही, संस्थापक एवं निदेशक, स्पीकिंगक्यूब; प्रो. (डॉ.) रीता कुमार; कर्नल (सेवानिवृत्त) डॉ. चेतन शारदा; प्रो. (डॉ.) गुलशन कुमार ढींगरा; प्रो. (डॉ.) निधि वर्मा; डॉ. राजेश सिंह; डॉ. दिग्विजय पांडे; डॉ. बृज मोहन शर्मा; प्रो. एम.एस. रावत तथा कार्यक्रम समन्वयकों सुश्री स्नेहा भारद्वाज, सुश्री काजल तोमर एवं सुश्री अनुपा कैरी के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष
संकाय विकास कार्यक्रम का समापन सभी विशेषज्ञों, आयोजकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार और सराहना के साथ हुआ। बारह दिनों तक चले इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को अनुसंधान पद्धति, अनुसंधान अभिकल्प, आंकड़ा संग्रहण, सांख्यिकीय विश्लेषण, अनुसंधान सॉफ्टवेयर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों, अकादमिक लेखन, शोध पत्रिका के चयन, पुस्तक प्रस्ताव लेखन तथा अनुसंधान नैतिकता से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को सीखने, संवाद करने और अकादमिक विकास के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। साथ ही, प्रतिभागियों को कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान को अपने वर्तमान एवं भविष्य के शोध कार्यों में उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।



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