April 16, 2026

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कोटा: हिंदुस्तान हिन्दू राष्ट्र है, समाज बड़ा है, संघ बड़ा नहीं है– निम्बाराम 

अरविन्द सिसोदिया, कोटा, 15 अप्रैल:  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कोटा महानगर की ओर से संघ शताब्दी वर्ष के क्रम में मंगलवार रात्री में आयोजित ” शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख जनों की गोष्ठी”, श्रीनाथपुरम स्थित शिव ज्योति सीनियर सेकेंडरी स्कूल सभागार में हुई।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम, कोटा विभाग संघचालक पन्नालाल शर्मा एवं कोटा महानगर संघचालक गोपाल लाल गर्ग मंचस्थ रहे। इस अवसर पर मुख्यवक्ता निम्बाराम नें कहा कि “हिंदुस्तान हिन्दू राष्ट्र है, समाज बड़ा है, संघ बड़ा नहीं है।

शताब्दी वर्ष में ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से समाज में स्व के बोध को प्रतिष्ठित करते हुये, सार्थक परिवर्तन लाना है। ” वहीं उन्होंने परिवार और समाज में संवाद बढ़ानें और विभिन्न नैरेटिव को समझकर उस पर चर्चा करने की आवश्यक पर जोर दिया।

मुख्य वक्ता संघ के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम ने आगे कहा कि “संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। शताब्दी वर्ष कैसे मनाया जाए, इस पर हुए मंथन में यह तय हुआ कि कोई उत्सव नहीं मनाया जाएगा, बल्कि मन से समीक्षा की जाएगी कि डॉ. हेडगेवार ने जो लक्ष्य रखा था, क्या हम वहां तक पहुंच पाए या नहीं।

संघ का कार्य सभी क्षेत्रों में बढ़ रहा है, परंतु जितना बढ़ना चाहिए, उतना नहीं बढ़ पाया। “अटल जी की कविता की पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने कहा— “पंद्रह अगस्त का दिन कहता—आजादी अभी अधूरी है, सपने सच होने बाकी हैं, रावी की शपथ न पूरी है।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्रप्रथम की प्रेरणा से डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की और व्यक्ति निर्माण के लिए शाखा प्रारंभ की। आज लाखों स्वयंसेवक “राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाने के लिए प्रार्थना करते है ” – “परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्…” संघ सम्पूर्ण समाज के संगठन का कार्य करता है और उसका कोई विरोधी नहीं है

क्षेत्र प्रचारक नें कहा कि ” संघ की 100 वर्ष की यात्रा और देश की 80 वर्ष की लोकतांत्रिक यात्रा में परिवर्तन स्पष्ट दिखाई देता है। संघ छोटा है, समाज बड़ा है। समाज में बड़ा परिवर्तन लाने के लिए समाज को साथ लेना आवश्यक है। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के साथ संवाद स्थापित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ” संघ की एक विशिष्ट कार्यपद्धति है, जिसकी अपनी जटिलता है। हर कोई संघ का कार्य नहीं कर सकता। संघ कार्य स्वयंसेवक करते हैं।

स्वयंसेवक नौकरी, व्यापार और पढ़ाई के साथ-साथ समय निकालकर संघ कार्य करते हैं। पारिवारिक व्यस्तताओं और अनेक परिस्थितियों के बावजूद संघ कार्य को प्राथमिकता देते हुए हजारों-लाखों स्वयंसेवकों ने कार्य खड़े किए हैं, जिसके कारण संघ निरंतर बढ़ रहा है।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए यह भाव आया कि समाज के बीच जाकर संघ क्या करता है, इसकी जानकारी दी जाए। इसी उद्देश्य से इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ” संघ का भाव रहता है कि हम जैसे हैं, वैसी ही जानकारी समाज को दी जाए। संघ में प्रमाणिकता, कटिबद्धता और पारदर्शिता है। संघ न तो कोई राजनीतिक पार्टी है, न ही NGO और न ही कोई संगठन मात्र—संघ जैसा है, वैसा ही है।

उन्होंने संघ संस्थापक ड़ा हेडगेवार के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि ” संघ के बारे में अनेक प्रश्न उठते हैं—संघ क्या है, क्यों स्थापित हुआ, और क्या करता है। संघ सम्पूर्ण समाज के संगठन का कार्य करता है, विशेष रूप से हिन्दू समाज के संगठन का।

संघ की स्थापना करने वाले डॉ. हेडगेवार जन्म से ही राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने अपने विद्यालय जीवन में रानी विक्टोरिया के जन्मदिन की मिठाई यह कहकर फेंक दी कि वे उस महारानी का उत्सव नहीं मना सकते जिसने भारत को गुलाम बनाया। वे अंग्रेजी शासन के सामने कभी नहीं झुके। आगे चलकर वे कलकत्ता गए, जहां उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के साथ क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया और अनुशीलन समिति के सक्रिय सदस्य रहे।1920 में नागपुर में हुए कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव रखा। बाद में 1929 के लाहौर अधिवेशन में भी यह मांग दोहराई गई।”

संघ की स्थापना से पूर्व और पश्चात भी डॉ. हेडगेवार ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया और जेल भी गए।

उन्होंने बताया कि डॉ. हेडगेवार के जीवन पर स्वामी विवेकानंद का गहरा प्रभाव था। विवेकानंद जी ने भारत भ्रमण के दौरान समाज की तीन प्रमुख समस्याओं को चिन्हित किया—संगठन का अभाव, व्यक्ति निर्माण की व्यवस्था का अभाव, और मातृभूमि के प्रति समर्पण की कमी।

‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाने का आह्वान किया और कहा कि इन सिद्धांतों को आचरण और व्यवहार में उतारना चाहिए।

संवाद सत्र में उपस्थित जनों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें ‘कल्चर मार्क्सिज्म’ से दूर रहना चाहिए तथा परिवार और समाज में संवाद बढ़ाना चाहिए। समाज में चल रहे विभिन्न नैरेटिव को समझकर उस पर चर्चा करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में भारत माता के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर राष्ट्रगीत के सामूहिक गान के साथ हुआ। मंच परिचय के उपरांत महानगर कार्यवाह महेश नागर ने संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों के विषय में बताते हुए इस कड़ी में पंचम प्रमुख गोष्ठी के बारे में अपने विचार रखे।

उन्होंने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए संघ के 100 वर्षों के इतिहास की संक्षिप्त प्रस्तावना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि अब तक 12 नगरों के साथ ही मातृशक्ति एवं शिक्षा क्षेत्र को मिलाकर 15 प्रमुख जनगोष्ठियों का आयोजन कोटा महानगर में हो चुका है।

कार्यक्रम के अंत में कोटा महानगर संघचालक श्री गोपाल लाल गर्ग ने सभी उपस्थित जनों, मातृशक्ति एवं विद्यालय प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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