July 30, 2026

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देहरादून: परेड ग्राउंड की बदहाल स्थिति पर फूटा युवाओं का गुस्सा, एक सप्ताह में समाधान नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

संजीव शर्मा, देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित परेड ग्राउंड प्रदेशभर के हजारों युवाओं के लिए केवल एक मैदान नहीं, बल्कि उनके सपनों को साकार करने का सबसे महत्वपूर्ण अभ्यास स्थल है।

प्रतिदिन सुबह और शाम यहां हजारों युवा पुलिस, सेना, अग्निवीर, अर्द्धसैनिक बलों, होमगार्ड, वन विभाग, खेल प्रतियोगिताओं तथा अन्य सरकारी भर्तियों की शारीरिक दक्षता परीक्षाओं की तैयारी करने पहुंचते हैं। लेकिन लगातार आयोजित हो रहे मेलों, प्रदर्शनियों, व्यावसायिक आयोजनों एवं अन्य कार्यक्रमों के कारण परेड ग्राउंड की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, जिससे युवाओं की तैयारी गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता आदर्श राठौर ने कहा कि परेड ग्राउंड को युवाओं की शारीरिक तैयारी के लिए विकसित किया गया था। यहां विशेष रूप से दौड़ के लिए ट्रैक बनाया गया है ताकि अभ्यर्थी बेहतर वातावरण में अभ्यास कर सकें। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि आज यह मैदान अपनी मूल पहचान खोता जा रहा है। लगभग हर सप्ताह किसी न किसी आयोजन के लिए पूरे मैदान पर पंडाल, स्टॉल, पार्किंग एवं अन्य अस्थायी व्यवस्थाएं कर दी जाती हैं, जिससे कई दिनों तक युवाओं को अभ्यास करने के लिए पर्याप्त स्थान ही नहीं मिल पाता।

उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक स्थिति तब पैदा होती है जब कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मैदान की समुचित सफाई तक नहीं की जाती। आयोजनों के बाद मैदान में जगह-जगह प्लास्टिक, कागज, थर्माकोल, कपड़े, खाने-पीने का कचरा और अन्य अपशिष्ट के बड़े-बड़े ढेर पड़े रहते हैं।

कई स्थानों पर गंदा पानी जमा हो जाता है और मैदान कीचड़ से भर जाता है। ऐसे हालातों में युवाओं के लिए दौड़ना तो दूर, सामान्य रूप से चलना भी मुश्किल हो जाता है। युवा साथियों का कहना है कि मेलों और प्रदर्शनियों के दौरान भारी ट्रक, कंटेनर, जेसीबी तथा अन्य बड़े वाहन मैदान के भीतर तक प्रवेश करते हैं। इन भारी वाहनों के कारण पूरे मैदान में गहरे टायरों के निशान पड़ जाते हैं, जिससे दौड़ का ट्रैक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है। मैदान कई दिनों तक ऊबड़-खाबड़ बना रहता है और युवाओं को मजबूरी में असमान एवं फिसलन भरी जमीन पर अभ्यास करना पड़ता है। इससे दुर्घटना होने और चोट लगने का खतरा लगातार बना रहता है।

उन्होंने कहा कि आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा मैदान कूड़े के ढेर, कीचड़ और भारी वाहनों के टायरों के निशानों से भर जाएगा तो युवा आखिर दौड़ेंगे कहां? जिन युवाओं का भविष्य कुछ सेकंड की दौड़ पर निर्भर करता है, उनकी मेहनत और वर्षों की तैयारी को इस प्रकार प्रभावित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि परेड ग्राउंड के आसपास रेंजर्स ग्राउंड, पवेलियन ग्राउंड एवं अन्य खुले मैदान भी उपलब्ध हैं, जहां ऐसे आयोजनों को स्थानांतरित किया जा सकता है। यदि प्रशासन उचित योजना बनाकर आयोजनों के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित करे तो न तो सामाजिक एवं व्यावसायिक कार्यक्रम प्रभावित होंगे और न ही युवाओं की तैयारी पर कोई असर पड़ेगा।

आदर्श राठौर ने कहा कि प्रदेश के अधिकांश अभ्यर्थी आर्थिक रूप से सामान्य परिवारों से आते हैं। वे महंगे निजी स्टेडियमों या स्पोर्ट्स कॉलेजों में शुल्क देकर अभ्यास करने में सक्षम नहीं हैं। उनके लिए परेड ग्राउंड ही सबसे सुलभ और भरोसेमंद अभ्यास स्थल है। यदि यही मैदान लगातार खराब स्थिति में रहेगा तो हजारों युवाओं के सपनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि परेड ग्राउंड में बने शौचालयों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय है। नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव में युवाओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। कई बार तो कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मैदान की सफाई स्वयं युवाओं को करनी पड़ती है, जबकि यह जिम्मेदारी संबंधित आयोजकों और प्रशासन की होनी चाहिए। युवाओं ने कहा कि इस विषय को लेकर कई बार युवाओं द्वारा प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखी गईं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। युवाओं का किसी मेले, प्रदर्शनी या सामाजिक आयोजन से कोई विरोध नहीं है, बल्कि उनकी केवल यही मांग है कि उनके भविष्य के साथ समझौता न किया जाए और आयोजनों के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए जाएं।

परेड ग्राउंड को युवाओं की शारीरिक तैयारी के लिए प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित रखा जाए।

मेलों एवं अन्य आयोजनों के लिए वैकल्पिक मैदान निर्धारित किए जाएं।

कार्यक्रम समाप्त होते ही 24 घंटे के भीतर मैदान की पूर्ण सफाई कराई जाए

भारी वाहनों के मैदान एवं दौड़ ट्रैक पर प्रवेश पर रोक लगाई जाए।

क्षतिग्रस्त ट्रैक की तत्काल मरम्मत एवं समतलीकरण कराया जाए।

मैदान एवं शौचालयों की नियमित साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।

समस्त युवाओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर जिला प्रशासन द्वारा इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो प्रदेशभर के युवाओं के साथ मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर आंदोलन के लिए बाध्य होना । इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

गौरव बर्थवाल, अभ्यार्थी

“हमने कई बार अपनी समस्या प्रशासन तक पहुंचाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। अगर इस बार भी हमारी आवाज नहीं सुनी गई, तो हम प्रदेशभर के युवाओं के साथ शांतिपूर्ण तरीके से जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे। यह आंदोलन किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए होगा।”- गौरव बर्थवाल, अभ्यार्थी

बृजेश चंद्र, अभ्यार्थी

“हम किसी मेले, प्रदर्शनी या सांस्कृतिक कार्यक्रम के विरोधी नहीं हैं। हमारी सिर्फ इतनी मांग है कि ऐसे आयोजनों के लिए कोई दूसरा मैदान तय किया जाए या फिर आयोजन के तुरंत बाद मैदान की सफाई और ट्रैक की मरम्मत कराई जाए। युवाओं के भविष्य से समझौता नहीं होना चाहिए।- “बृजेश चंद्र, अभ्यार्थी

प्रियकां चौहान, अभ्यार्थी

“हम भी रोज यहां पुलिस और अन्य भर्तियों की तैयारी करने आते हैं। लेकिन मैदान की हालत देखकर बहुत निराशा होती है। जगह-जगह गंदगी, प्लास्टिक, कीचड़ और टूटे हुए हिस्से पड़े रहते हैं। शौचालयों की स्थिति भी बहुत खराब है। ऐसे माहौल में नियमित अभ्यास करना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन को चाहिए कि कार्यक्रम खत्म होने के तुरंत बाद पूरे मैदान और शौचालयों की सफाई कराई जाए और भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि युवाओं की तैयारी प्रभावित न हो।”- प्रियकां चौहान, अभ्यार्थी

आदर्श राठौर ,सामाजिक कार्यकर्ता

“परेड ग्राउंड केवल एक मैदान नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के हजारों युवाओं के सपनों की नींव है। रोज़ सुबह चार-पांच बजे से लेकर देर शाम तक प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए युवा यहां पुलिस, सेना, अग्निवीर, वन विभाग और अन्य सरकारी भर्तियों की शारीरिक तैयारी करते हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि आज इस मैदान को उसकी मूल पहचान से दूर किया जा रहा है। लगातार मेले, प्रदर्शनियां और अन्य आयोजन कराए जा रहे हैं, जिससे युवाओं की तैयारी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।”- आदर्श राठौर ,सामाजिक कार्यकर्ता

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