March 26, 2026

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धनौरी पी.जी. कॉलेज में विश्व दर्शन दिवस के उपलक्ष्य में हुआ एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

हरिद्वार:  धनौरी एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन 25 मार्च, 2026 को धनौरी पी.जी. कॉलेज में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सभी अतिथियों द्वारा पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सचिव श्री आदेश कुमार जी के आशीर्वचनों से हुई। उन्होंने अपने उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह हमारी संस्कृति, मूल्यों एवं जीवन-दर्शन की आधारशिला है।

संगोष्ठी के निदेशक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विजय कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा हमारे जीवन में नैतिक मूल्यों को स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है, जो समाज को सुदृढ़ बनाती है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. ग्रीस अवस्थी जी (पूर्व कुलसचिव, उत्तराखंड संस्कृत महाविद्यालय) ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा मानव जीवन में समर्पण, भक्ति, भाव एवं आध्यात्मिकता जैसे गुणों का विकास करती है।

मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. मुक्तिनाथ यादव जी ने अपने व्याख्यान में IKS (Indian Knowledge System) के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए प्राचीन सभ्यताओं, बौद्ध दर्शन एवं बौद्ध साहित्य के महत्व को विस्तार से समझाया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. डॉ. रजत अग्रवाल जी (IIT Roorkee) ने अपने संबोधन में अर्थव्यवस्था को IKS से जोड़ते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विशिष्ट वक्ता डॉ. उमेश कुमार शुक्ला जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए विशेष रूप से ‘भाव’ के महत्व पर प्रकाश डाला और इसे भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल तत्व बताया।

संरक्षक के रूप में डॉ. इवांशु सैनी (Director, Prithvi Singh Viksit College) की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. गौरव कुमार मिश्रा (Assistant Professor, हिंदी विभाग) रहे, जिनके कुशल निर्देशन एवं समन्वय से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अरविंद कुमार श्रीवास्तव जी द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गौरव कुमार मिश्रा जी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

अंत में आयोजन टीम में सह-संयोजक के रूप में डॉ. गुड्डी चमोली एवं डॉ. रोमा, आयोजन सचिव डॉ. अर्पित, तथा आयोजन सह-सचिव डॉ. संदीप कुमार एवं डॉ. शौर्यादित्य का विशेष योगदान रहा।

अंत में सभी अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया गया तथा कार्यक्रम का समापन सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ।

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