भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत National Service Scheme (NSS) क्षेत्रीय निदेशालय, लखनऊ के तत्वावधान में 22 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय एकीकरण शिविर का आयोजन देव संस्कृति विश्वविद्यालय,हरिद्वार (उत्तराखंड) में संपन्न हुआ ।
इस शिविर में राजकीय महाविद्यालय थत्यूड़ की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की कार्यक्रम अधिकारी , डॉ संगीता कैंतुरा एवं बी ए प्रथम वर्ष की दो छात्राओं , वंशिका एवं वैष्णवी, ने किया उत्तराखंड के विभिन्न महाविद्यालय एवं विश्विद्यालय के 44 छात्र छात्राओं सहित प्रतिभाग किया।
राजकीय महाविद्यालय थत्यूड़ से डॉ संगीता कैंतुरा, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय करणप्रयाग से डॉ चंद्रावती एवं गुरुकुल कांगड़ी विश्विद्यालय से डॉ मयंक पोखरियाल के नेतृत्व में इन छात्रों ने राष्ट्रीय एकीकरण शिविर ,हरिद्वार में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया। उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर आधारित कार्यक्रमों से छात्र छात्राओं ने मोहक प्रस्तुतियां दी।
जिसमें रमम्माड, जागर, नंदा देवी राज जात, नाटी आदि नृत्यों का प्रदर्शन हुआ। अन्य राज्यों ने भी अपनी लोक संस्कृति के आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इन सात दिवसों में छात्रों को साइबर सिक्योरिटी, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, भारतीय ज्ञान परंपरा आदि पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया। सादे जीवन उच्च विचार से प्रेरित शांतिकुंज, हरिद्वार एवं चंडी घाट का भ्रमण भी किया गया।छात्रों ने रंगोली , पोस्टर आदि प्रतियोगिताओ से भी अपनी लोक संस्कृति का परिचय दिया।
इस सात दिवसीय राष्ट्रीय शिविर में देश के 13 राज्यों—कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड—से 200 विश्वविद्यालयों के स्वयंसेवक (100 छात्र एवं 100 छात्राएँ) सहभागिता कर रहे हैं।
शिविर के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक, बौद्धिक एवं सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को नेतृत्व, सेवा और समन्वय की भावना से ओत-प्रोत किया गया।
महाविद्यालय परिवार कार्यक्रम के आयोजक, क्षेत्रीय निदेशक nss श्री समरदीप सक्सेना जी, युवा अधिकारी श्री राजेश तिवारी जी ,उत्तराखंड की राज्य अधिकारी डॉ सुनैना रावत जी एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कार्यक्रम समन्वयक डॉ उमाकांत इंदौलिया जी की आभार प्रकट करता है कि उन्होंने दूरस्थ महाविद्यालय के छात्रों का चयन कर उत्तराखंड की असल लोक परंपराओं को उजागर किया।


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