हरिद्वार: सामान्य मंच ने राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित कर यूजीसी अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की मांग की है। सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित करने के दौरान मंच के संयोजक बालकृष्ण शास्त्री ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांगों के अधिकारों की सुरक्षा विश्वविद्यालय एवं उच्च संस्थानों में की गई है।
लेकिन इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव किया गया है। उन्हें नजरअंदाज किया गया है। जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस कानून से जात-पात का भेदभाव बढ़ेगा। कानून का दुरुपयोग होगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को वापस लिया जाना चाहिए।
डा.जितेंद्र सिंह व सुनील सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत आधार रखा गया है। जिससे आपसी समन्वय भी प्रभावित होगा। संविधान में सभी को बराबरी का अधिकार दिया गया है। सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों पर कुठाराघात किया जाना सरासर गलत है।
प्रेमचंद्र शास्त्री ने कहा कि सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए कानून और नियम बनाए जाने चाहिए थे। यह अधिसूचना एक तरफा दृष्टिकोण रखती है। जिससे कई तरह के विवाद उत्पन्न होंगे। सामान्य वर्ग के छात्रों का उत्पीड़न होने का भी अंदेशा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह का कानून गलत है। सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए इस नियम कानून को वापस लेना चाहिए। ज्ञापन सौंपने वालों में डा.जितेंद्र सिंह, सुनील सिंह, मुरारी पांडे, अमित, प्रेमचंद शास्त्री, महिपाल, रामचंद्र कनौजिया, प्रीतम गुप्ता, हिमांशु द्विवेदी, विकास झा, रामेश्वर गौड़, विपिन शर्मा, अमित शर्मा, श्रवण झा, प्रशांत शर्मा, विकास तिवारी, चंद्रमणि, विपिन आदि शामिल रहे।



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