August 9, 2026

Naval Times News

निष्पक्ष कलम की निष्पक्ष आवाज

अमर शहीद रायफलमैन मंदीप सिंह रावत की पुण्य स्मृति में नगर स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

देहरादून, 9 अगस्त 2026: शहीद कभी मरते नहीं—वे अपने साहस, त्याग और आदर्शों के रूप में आने वाली पीढ़ियों के भीतर जीवित रहते हैं।

इसी विचार को चरितार्थ करते हुए अमर शहीद रायफलमैन मंदीप सिंह रावत जी के शहादत दिवस की स्मृति में देवभूमि पहल समिति, उत्तराखंड द्वारा नगर स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन हेमनदास रितेश शर्मा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, जानकीनगर में किया गया।

यह आयोजन केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि शहीद की शहादत को नमन, युवा प्रतिभा को सम्मान और राष्ट्र निर्माण के लिए नई पीढ़ी को तैयार करने का एक सार्थक संकल्प बनकर सामने आया।

नगर के 11 विद्यालयों से आए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने मंच पर अपने विचारों की ऐसी प्रभावशाली प्रस्तुति दी कि सभागार में कहीं तर्कों की गूंज सुनाई दी तो कहीं आत्मविश्वास से भरी आवाजों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। विद्यार्थियों ने अपने विचारों को तथ्यों, तर्कों, उदाहरणों और स्पष्ट अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया कि जब युवाओं को अवसर मिलता है तो उनकी प्रतिभा समाज की दिशा बदलने की क्षमता रखती है।

शहीद की वीरगाथा ने नम की आंखें, दिलों में जगाया देशप्रेम

कार्यक्रम का शुभारंभ शहीद मंदीप सिंह रावत जी की माता श्रीमती सुमा देवी, उनके परिवार की ओर से अंजली रावत, निर्णायकगण एवं विशिष्ट अतिथियों—प्रधानाचार्य महेंद्र गौड़, हेमनदास सरस्वती शिशु मंदिर, रितेश शर्मा, सरस्वती विद्या मंदिर जानकीनगर एवं मनोज कुकरेती जी—द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं शहीद को पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व शहीद मंदीप सिंह रावत जी के जीवन, वीरता, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके अदम्य समर्पण पर आधारित एक मार्मिक एवं प्रेरणादायी डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई।

डॉक्यूमेंट्री के दौरान सभागार का वातावरण भावुक हो उठा। शहीद के जीवन की झलकियों ने उपस्थित लोगों की आंखों को नम कर दिया और हृदय में यह भाव और गहरा कर दिया कि—

“देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की सबसे बड़ी स्मृति यही है कि उनकी शहादत से युवा पीढ़ी को राष्ट्र के लिए जीने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिले।”

शहीद की माता की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी भावनात्मक एवं गरिमामय बना दिया।

मंच बना विचारों का रणक्षेत्र, तर्कों से दिखी प्रतिभा की ताकत

प्रतियोगिता के नियमों की जानकारी अभय जुयाल द्वारा सभी प्रतिभागियों को दी गई। प्रतियोगिता को दो चरणों में आयोजित किया गया तथा विद्यार्थियों को तीन वर्गों में विभाजित किया गया।

प्रथम चरण में प्रत्येक वर्ग से छह विद्यार्थियों ने पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने विषय की गहराई को समझते हुए तर्क, तथ्य, विवेक, आत्मविश्वास और प्रभावशाली वक्तृत्व-कौशल का परिचय दिया।

किसी के तर्कों में तथ्य की मजबूती थी, किसी की आवाज में आत्मविश्वास था तो किसी की प्रस्तुति में नेतृत्व की झलक दिखाई दी। मंच पर खड़े इन विद्यार्थियों ने साबित किया कि आज का जागरूक विद्यार्थी ही कल का सशक्त नागरिक और नेतृत्वकर्ता बनेगा।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों का चयन अंतिम चरण के लिए किया गया, जहां मुकाबला और अधिक रोचक एवं चुनौतीपूर्ण हो गया।

अर्चिता काला ने हासिल किया प्रथम स्थान

प्रतियोगिता में अपने शानदार तर्क, प्रभावशाली प्रस्तुति और आत्मविश्वास के बल पर टी.सी.जी. की अर्चिता काला ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

तिस्ता कॉन्वेंट स्कूल ने द्वितीय स्थान तथा स्कॉलर्स एकेडमी की आराध्या कुकरेती ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

विजेताओं को सम्मानित करने के साथ-साथ सभी प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की गई। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि जीत केवल पुरस्कार प्राप्त करने का नाम नहीं, बल्कि अपनी क्षमता को पहचानकर उसे निरंतर बेहतर बनाने का नाम है।

“युवाओं की आवाज में ही भविष्य के भारत की दिशा छिपी है”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देवभूमि पहल समिति के अध्यक्ष शिवम नेगी ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों, उनके सहयोगी शिक्षकों एवं आयोजन स्थल उपलब्ध कराने वाले विद्यालय परिवार का हृदय से आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि देवभूमि पहल समिति का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं को मंच देना, उनमें राष्ट्र एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना और उन्हें सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।

उन्होंने सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में अधिक से अधिक युवाओं एवं नागरिकों से देवभूमि पहल के साथ जुड़ने और समाजहित के कार्यों में बढ़-चढ़कर योगदान देने का आह्वान किया।

शहादत से प्रेरणा, प्रतिभा से परिवर्तन और संकल्प से राष्ट्र निर्माण

देवभूमि पहल समिति का यह आयोजन अपने पीछे एक गहरा संदेश छोड़ गया—

शहीदों को केवल माल्यार्पण और श्रद्धांजलि से याद करना पर्याप्त नहीं है। उनकी शहादत को अपने जीवन के मूल्यों में उतारना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

रायफलमैन मंदीप सिंह रावत जी ने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। आज उन्हीं की स्मृति में जब युवा विद्यार्थी मंच पर खड़े होकर अपने विचारों को निर्भीकता से व्यक्त करते हैं, तो यह उस शहादत की जीवंत और सार्थक विरासत का प्रतीक बन जाता है।

कार्यक्रम ने युवाओं को एक स्पष्ट संदेश दिया—

“कलम में विचार हों, विचारों में राष्ट्र हो और कर्म में समाज के प्रति जिम्मेदारी हो—यही सशक्त युवा और सशक्त राष्ट्र की पहचान है।”

कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी मंच संचालन निधि बहुखंडी एवं विद्यालय के आचार्य रोहित बलोधी जी द्वारा किया गया।
निर्णायकों में समाज शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ संदीप कुमार, पूर्व प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह रावत पूर्व प्रधानाचार्य आनंद बंसवाल जी रहे।

इस अवसर पर देवभूमि पहल समिति के अध्यक्ष शिवम नेगी, महासचिव उत्कर्ष नेगी, कोषाध्यक्ष सौरव धूलिया, कार्यकारिणी सदस्य अभय जुयाल, नैन्सी रावत, आशुतोष रावत, रोहित कुमार, दीपक मैंदोला, दीप नारायण, हिमांशु रावत, शुभम सुयाल, यशिका ज़ख्वाल, कविता, वन आरक्षी सीमा नेगी, सुमित नेगी, दिग्विजय सिंह, प्रणिता कंडवाल, अनन्या नैथानी सहित जय देवभूमि फाउंडेशन के अध्यक्ष शिवानंद लखेड़ा एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
एक शहादत—अनेक प्रेरणाएं
एक मंच—अनेक प्रतिभाएं
एक संकल्प—सशक्त राष्ट्र

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