June 16, 2026

Naval Times News

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जिम से वर्जिश कर निकले 20 साल के युवक की मौत, हार्ट अटैक की आशंका

ब्यूरो: ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख गांव में शनिवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां महज 20 साल के युवक शरद कुमार की जिम में वर्कआउट करने के कुछ देर बाद मौत हो गई।

मूल रूप से बुलंदशहर के रहने वाले शरद, गौड़ सिटी मॉल के एक सैलून में मैनेजर थे और परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे।

सेहत बनाने की चाहत और जिम में पसीना बहाने का जूनून अब युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है।

चश्मदीदों के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे जिम से एक्सरसाइज कर बाहर निकलते ही शरद अचानक लड़खड़ाए और पास के नाले की दीवार पर गिर पड़े।

अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के शुरुआती अनुमान के मुताबिक मौत की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है, हालांकि असली वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद साफ होगी।

राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. आर.के. गुप्ता के अनुसार, 18 से 30 वर्ष के युवाओं में दिल के दौरे के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिसकी मुख्य वजह खराब लाइफस्टाइल और अनियंत्रित तनाव है।

जानकारी के अनुसार वह 3 महीने से बिसरख गांव के जिम में एक्सरसाइज कर रहे थे। शनिवार 11:30 बजे करीब पुलिस कर्मियों का फोन आया और बताया कि शरद एक नाली के ऊपर गिर गए है उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई है।

क्‍यों आ रहा युवाओं को हार्ट अटैक?

छिपी हुई बीमारियां: कई युवाओ के दिल की धमनियों में पहले से से ही ब्लॉकेज होता है या उन्हें ‘हाइपरट्रोफिक कार्डियोमायोपैथी’ (दिल की मासपेशियो का जन्मजात मोटा होना) जैसी जेनेटिक बीमारी होती है। जब वे बिना किसी मेडिकल चेकअप के अचानक भारी एक्सरसाइज शुरू करते है, तो दिल पर दबाव बढ़ने से वह फेल हो जाता है।

सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड का सेवन : जल्दी बॉडी बनाने के चक्कर में युवा अक्सर जिम ट्रेनर्स के बहकावे में आकर सिथेटिक प्रोटीन, प्री-वर्कआउट।

क्षमता से ज्यादा वर्कआउट: दूसरों को देखकर या सोशल मीडिया रील्स के प्रभाव मे आकर युवा अपनी शारीरिक क्षमता से ज्यादा वजन उठाने लगते है। अत्यधिक और तीव्र कार्डियो या हैवी वेट लिफ्टिंग से ‘प्लाक रप्चर’ हो सकता है, जिससे नसें तुरंत ब्लॉक हो जाती है और हार्ट अटैक आ जाता है।

विशेषज्ञों की सलाह

  • जिम जॉइन करने से पहले 20 साल की उम्र के बाद भी एक बार ECG और 2D ईको टेस्ट जरूर करवाएं।
  • वर्कआउट के दौरान यदि सीने में भारीपन, सांस फूलना या चक्कर आने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  • बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार के ‘फैट बर्नर’ या ‘प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट’ का सेवन कभी न करें।
  •  सप्लीमेट्स और अनाबोलिक स्टेरॉयड लेने लगते है। इनमें भारी मात्रा में कैफीन और अन्य उत्तेजक पदार्थ होते है, जो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ा देते है।

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