राजकीय महाविद्यालय बलुवाकोट में हिंदी विभाग द्वारा शिक्षण में आईसीटी की अनुप्रयोग संसाधन एवं चुनौतियां विषय पर दो दिवसी ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन डॉ चंद्रकांत तिवारी के संयोजन और प्राचार्य डॉक्टर सुभाष वर्मा के दिशा निर्देशन में किया गया।
जिसमें प्रथम दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट कुलपति शोभन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर नवीन चंद्र लोहनी कुलपति उत्तराखंड विश्वविद्यालय हल्द्वानी द्वारा आभासी माध्यम से सहभागिता करते हुए संगोष्ठी का शुभारंभ किया।
प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट कुलपति सोहन सिंह जीना विश्वविद्यालय ने कहा की शिक्षक को तकनीकी ज्ञान की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है बिना आईसीटी के शिक्षक अपूर्ण है इसी क्रम में कुलपति उत्तराखंड प्रोफेसर लोहानी द्वारा कहा गया कि तकनीकी ज्ञान और सकारात्मक दृष्टि और निरंतर प्रयास एवं उनके अनुप्रयोगों से ही शिक्षक को दुर्गम स्थानों तक पहुंचा जा सकता है।
ऑनलाइन संगोष्ठी में देशभर से 50 से अधिक विद्वानों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र का वाचन किया लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ केंद्रीय विश्वविद्यालय नई दिल्ली की प्रोफेसर अमिताभ पांडे भारद्वाज के द्वारा मुख्य रिसोर्स पर्सन के रूप में आईसीटी टूल्स के संदर्भ में ज्ञानवर्धक जानकारी दी गई साथ ही हाथ ऑन प्रेक्टिस वर्क के रूप में भी प्रतिभागियों से इंटरेक्शन किया गया।
दूसरे रिसोर्स पर्सन के रूप में पूर्व प्रोफेसर पुरानचंद टंडन दिल्ली विश्वविद्यालय हिंदी विभाग द्वारा हिंदी भाषा शिक्षण में मशीनी अनुवाद संसाधन और चुनौतियां विषय पर व्याख्यान दिया गया और तकनीकी कैसे भाषा को मदद पहुंचा रही है इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई पूर्णिया विश्वविद्यालय जयपुर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रोफेसर सत्येंद्र मुरली द्वारा मीडिया और पत्रकारिता का संबंधी विभिन्न गुण रहस्यों को उजागर करते हुए मीडिया में तकनीकी के विभिन्न प्रयोगों के बारे में जानकारी प्रदान की गई ।
कोलकाता से राजभाषा हिंदी के अधिकारी विनय कुमार शुक्ल द्वारा नई तकनीकी और राजभाषा संबंधी नए सॉफ्टवेयर पर विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान की गई संगोष्ठी का संचालन डॉक्टर चंद्रकांत तिवारी जी द्वारा किया गया।
डॉ अतुल चंद द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं आभार प्रकट किया गया आईसीटी के महत्व पर बताते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना के पैनेडिमिक काल मे आईसीटी के उपयोग के द्वारा ही शिक्षण कार्य किया गया जिससे कि शिक्षा के क्षेत्र में कोई कमी नहीं आ सकी और हम विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से ज्ञान प्रदान कर सके आईसीटी शिक्षण का एक प्रमुख टूल्स है
संगोष्ठी के दूसरे दिवस पर प्रचार्य डॉ सुभाष चंद्र वर्मा जी द्वारा तकनीकी के महत्व और उनके अनुप्रयोगों के संदर्भ में जानकारी प्रदान की गई और सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया मुख्य अतिथि के रूप में प्रोफेसर होशियार सिंह धामी पूर्व कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालय ने यूनेस्को के शिक्षा संबंधी चार स्तंभों पर अपनी बात रखी शिक्षा के महत्व उसकी उपयोगिता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि के पहलुओं पर चर्चा की गई और कहा गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज की शिक्षा और ज्ञान का प्रमुख स्तंभ है शिक्षा को मानवता को समर्पित होना चाहिए ।
दून विश्वविद्यालय देहरादून के प्रोफेसर आर के पुरोहित जी द्वारा आईसीटी के सकारात्मक उपयोग के संदर्भ में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई और यह भी कहा गया कि सरकार की योजनाएं इस दिशा में सक्रिय और सकारात्मक रूप से कार्य कर रही है दुर्गम एवं दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की बुनियादी पहुंच को बढ़ानी होगी।
संयुक्त निदेशक डॉक्टर आनंद सिंह उनियाल जी द्वारा कहा गया इस तरह की संगोष्ठी से शिक्षकों एवं छात्रों को नई-नई जानकारी प्राप्त होगी शोध पत्रों का मूल्यांकन डॉ संदीप कुमार डॉ पूर्णिमा विश्वकर्मा डॉ चंद्रा नबियाल डॉ सुनीता जोशी डॉ पिंकी डॉ पवन शाह के द्वारा किया गया बैंगलोर से जुड़ी हुई प्रोफेसर लता चौहान द्वारा श्री कृष्ण स्तुति पर एक सुंदर गायन प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय डॉ नवीन कुमार डॉ राहुल तिवारी श्री कविंद्र जोशी श्री वीरेंद्र सिंह श्रीमती आशा श्री विकास सिंह श्री मनोज कुमार श्रीमती अनीता श्रीमती देव की आदि ने सहयोग किया प्रोफेसर सुभाष वर्मा प्राचार्य द्वारा सभी का आभार प्रकट किया गया और डॉ चंद्रकांत तिवारी को ऑनलाइन संगोष्ठी करने हेतु शुभकामनाएं प्रेषित की <This message was edited>


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