चिन्यालीसौड़़ : उत्तराखंड संस्कृत संस्थान, हरिद्वार और राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़ के संयुक्त तत्त्वावधान में संस्कृत मास महोत्सव के उपलक्ष्य में आज दिनांक 09 सितंबर 2026 को संस्कृत भाषा की सार्वभौमिकता विषय पर ई- संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सोमदेव शतांशु रहे, मुख्य अतिथि प्रज्ञा प्रवाह उत्तराखंड व उत्तप्रदेश प्रान्त संयोजक श्री भगवती प्रसाद राघव रहे तथा अतिथि वक्ता के रूप में डॉ हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर के सहायक आचार्य डॉ.नौनिहाल गौतम रहे, संगोष्ठी के सूत्रधार उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के सचिव प्रोफेसर विनय विद्यालंकार रहे। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राध्यापक प्रोफेसर प्रभात द्विवेदी जी ने की, संगोष्ठी का संचालन संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका तथा संस्कृत मास महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रदेश के 13 जनपदों में आयोजित ई – संगोष्ठियों के अंतर्गत उत्तरकाशी जनपद की संयोजक डॉ मंजू पाण्डे ने की। यह ई-गोष्ठी अंतर्जालीय माध्यम से हुई तथा इसमें राज्य के विभिन्न महाविद्यालय में कार्यरत संस्कृत प्राध्यापक , संस्कृत विषय के शोधार्थी, हिंदी तथा अन्य विषयों के प्राध्यापक व शोधार्थियों व विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती वंदना, दीप प्रज्ज्वलन व वैदिक मंगलाचरण से हुआ, प्रस्ताविक उद्बोधन में डॉ.विनय विद्यालङ्कार सचिव उत्तराखंड संस्कृत संस्थान ने उत्तराखण्ड संस्कृत संस्थान के द्वारा संचालित विभिन्न संस्कृत संवर्धन योजनाओं के विषय में बताया तथा उन्होंने वैदिक व अलौकिक संस्कृत के माहात्म्य को प्रकट किया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पर्यावरणविद् श्री भगवती प्रसाद राघव जी ने अपने उद्बोधन में संस्कृत साहित्य में पर्यावरण चिन्तन विषय पर प्रकाश डाला।
ई- गोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रोफेसर सोमदेव शतांशु संस्कृत भाषा के सार्वभौमिकता विषय पर अपना वैज्ञानिक व्याख्यान रखा , उन्होंने भाषा विज्ञान के सिद्धांतों के माध्यम से संस्कृत की वैज्ञानिकता को सिद्ध किया तथा विभिन्न भाषाओं का संस्कृत से सम्बन्ध संस्कृत में विभिन्न विज्ञानों का समावेश उन्होंने अपने व्याख्यान में प्रस्तुत किया।
विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर के सहायक आचार्य डॉ.नौनिहाल गौतम रहें, उन्होंने अपने वक्तव्य में संस्कृत भाषा व संस्कृत साहित्य वेद उपनिषद् आदि में विद्यमान आचार व जीवनमूल्यों पर प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि आदर्श मानव जीवन जीने के लिए संस्कृत के सूत्रों व सूक्तियों को अपने जीवन में उतारना ही होगा।
अपने सम्बोधन में कार्यक्रम के अध्यक्ष व राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़़ के प्राचार्य प्रोफेसर प्रभात द्विवेदी जी ने संस्कृत व हिंदी के सम्बन्ध को वैज्ञानिकता के साथ उजागर किया, उन्होंने अपने संबोधन में संस्कृत विषय की संगोष्ठी के आयोजन हेतु प्रसन्नता व्यक्त की।
इस ई- संगोष्ठी में जनपद सहसंयोजक के रूप में राजकीय महाविद्यालय चिन्यालीसौड़़ के हिंदी विभाग के प्राध्यापक श्री यशवंत सिंह रहे तथा तकनीकी संयोजक के रूप में श्री आलोक बिजल्वाण रहे। तकनीकी सत्र के अंतर्गत श्री बृजेश चौहान ने तकनीकी सहयोग किया|
संगोष्ठी में महाविद्यालय के डॉ कृष्णा डबराल, डॉ खुशपाल, डॉ पवन कुमार, डॉ विनीत कुमार, डॉ सुगन्धा वर्मा, डॉ भूपेश चंद्र पंत, डॉ निशी दुबे, डॉ प्रभात कुमार सिंह, डॉ आराधना राठौर, डॉ नेहा बिष्ट, डॉ अशोक कुमार अग्रवाल, डॉ कुलवीर सिंह राणा, श्रीमती उर्वशी जुयाल, श्री स्वर्ण सिंह, श्री मदन सिंह, श्री रोशन लाल, श्री होशियार सिंह, श्री जीतेन्द्र सिंह, श्री जय प्रकाश भट्ट, श्री सुनील गैरोला, श्री अमीर सिंह चौहान, श्री सुनील रमोला, श्री नरेश रमोला, श्री कौशल सिंह बिष्ट, श्री धनराज सिंह बिष्ट, श्रीमती हिमानी, श्री संजय कुमार, श्री रमेश चंद्र एवं बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं भी उपस्थित रहे।


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