आज दिनाँक 29 अगस्त 2025 को राजकीय महाविद्यालय नैनबाग में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर नशा मुक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. मंजू कोगियाल ने की।
छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. मंजू कोगियाल ने कहा कि खेलों से अनुशासन, मानसिक विकास, विपरीत परिस्थितियों में संयम तथा आदर–सम्मान की भावना विकसित होती है बल्कि युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से बचाए रखने में भी खेलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने यह कहा कि स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ मस्तिष्क की पहचान है और अच्छे व्यक्तित्व एवं मस्तिष्क विकास के लिए खेलों को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
इस अवसर पर नशा मुक्ति प्रकोष्ठ की नोडल अधिकारी डॉ. मधुबाला जुवांठा ने सामाजिक विकास में खेलों की भूमिका विषय पर पावर प्वाइंट प्रस्तुति दी।
उन्होंने कहा कि खेल केवल शारीरिक तंदुरुस्ती का माध्यम ही नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं में सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों के विकास का भी साधन हैं।
खेल और नशामुक्ति के संबंध पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि खेलों में भागीदारी से युवा न केवल विवादों से दूर रहते हैं, बल्कि नशे जैसी बुराइयों से भी बचते हैं। आज नशे की बढ़ती प्रवृत्ति विश्वभर के लिए एक चुनौती है, क्योंकि यह युवाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करती है।
उन्होंने आगे कहा कि खेल मनोविज्ञान हर आयु वर्ग के लोगों को स्वस्थ, अनुशासित और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
खेल युवाओं को सक्रिय और व्यस्त रखते हैं, साथ ही तनाव व अवसाद से मुक्त करने में सहायक होते हैं। जीत और हार के अनुभव,मानसिक दृढ़ता प्रदान करते हैं, जबकि खेलों से मिलने वाली खुशी और उपलब्धि उन्हें नशे से दूर रखती है।
डॉ. जुवांठा ने कहा कि ये सभी गुण युवाओं को योग्य एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक हैं।
कार्यक्रम के आयोजक एवं समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कुमार ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय खेल दिवस के महत्व और उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी दी।
आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. परमानंद चौहान ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल और व्यायाम शारीरिक एवं मानसिक दोनों स्तरों पर ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि नशा करना है तो खेलकूद का करो, मादक पदार्थों का नहीं।
उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन किसी न किसी खेल गतिविधि को जीवन का हिस्सा बनाने का आग्रह किया, ताकि वे शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें। कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राद्यापक,शिक्षणेत्तर कर्मचारी छात्र–छात्राएँ उपस्थित रहे।