हरिद्वार, 18 जनवरी : शताब्दी समारोह के अंतर्गत ध्वज वंदन समारोह के दोपहरकालीन सभा में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेया शैलदीदी पहुँची और हजारों स्वयंसेवकों को स्नेह, प्रेरणा और आत्मीयता का पोषण प्रदान किया। उनके सान्निध्य मात्र से ही सेवाभाव में जुटे स्वयंसेवकों के चेहरे उल्लास और ऊर्जा से भर उठे।
इस अवसर पर श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि स्वयंसेवक का निस्वार्थ श्रम, अनुशासन और समर्पण ही युग-परिवर्तन की नींव रखता है। उन्होंने गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा जी त्यागशीलता की गाथा से अवगत कराया।
शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने स्वयंसेवकों को युग निर्माण योजना में जुट जाने के प्रेरित किया और स्वयंसेवकों को गायत्री महामंत्र का एक साधना का आध्यात्मिक महामंत्र बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
इससे पूर्व श्रद्धेया शैलदीदी ने शताब्दी समारोह में स्थापित युग़ऋषि की पावन स्मारक, विराट पुस्तक मेले एवं भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शनी में प्रस्तुत विचार, साहित्य और चित्रात्मक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए इसे युगचेतना के विस्तार का सशक्त माध्यम बताया तथा विधिवत शुभारंभ किया।
वहीं शांतिकुंज व्यवस्थापक श्री योगेन्द्र गिरि, श्री गौरीशंकर सैनी आदि ने भी अपने विचार रखे।


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