देवेंद्र सक्सेना, कोटा: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने देश की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में व्यापक एवं दीर्घकालिक सुधारों की आवश्यकता पर बल देते हुए अपने 15 सूत्रीय सुझाव सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार हेतु भारत सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय कार्य बल (High-Powered Task Force on Reforms in Public Examinations) को भेजे हैं।
महासंघ ने कहा है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल प्रश्न-पत्र की सुरक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी समग्र व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जो सुरक्षित, पारदर्शी, वैज्ञानिक, विश्वसनीय, समावेशी और विद्यार्थी-केंद्रित हो तथा बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप भविष्य के लिए सक्षम हो।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएँ विद्यार्थियों के भविष्य और देश की शैक्षिक व्यवस्था से सीधे जुड़ी हैं, इसलिए उनमें विश्वास और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि परीक्षा सुधार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था बनाना होना चाहिए जिसमें विद्यार्थी की वास्तविक ज्ञान, क्षमता और दक्षता का निष्पक्ष आकलन हो तथा किसी तकनीकी, प्रशासनिक अथवा प्रक्रियागत कमी का दुष्परिणाम विद्यार्थी को न भुगतना पड़े।
प्रो. गुप्ता ने कहा कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और एकमात्र हाई स्टेक्स वाली परीक्षा पर निर्भरता को कम करने के लिए एक विद्यार्थी–अनेक प्रमाणित मूल्यांकन–एक राष्ट्रीय मेरिट फ्रेमवर्क की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है।
विद्यालयी शिक्षा, बोर्ड परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं के बीच बेहतर समन्वय, दक्षता-आधारित मूल्यांकन तथा आवश्यकता के अनुसार बहु-चरणीय एवं बहु-अवसर वाली परीक्षा व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। साथ ही चिकित्सा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक अवसरों का विस्तार भी परीक्षा संबंधी अत्यधिक दबाव को कम करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
राष्ट्रीय महामंत्री प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में स्थायी विश्वास तभी कायम हो सकता है जब उसकी प्रत्येक कड़ी में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित हो। महासंघ ने राष्ट्रीय प्रश्न बैंक, विविध एवं स्वतंत्र विशेषज्ञ तंत्र, वैज्ञानिक मॉडरेशन, बहु-स्तरीय प्रश्न-पत्र सुरक्षा, एन्क्रिप्टेड प्रश्न-पत्र, डिजिटल ऑडिट ट्रेल तथा स्वतंत्र परीक्षा-सुरक्षा एवं खुफिया तंत्र विकसित करने का सुझाव दिया है।
एनटीए एवं अन्य प्रमुख परीक्षा संस्थाओं को पेशेवर, अकादमिक नेतृत्व वाले और कार्यात्मक रूप से स्वतंत्र संस्थानों के रूप में सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
प्रो. भट्ट ने कहा कि परीक्षा सुधारों का केंद्र विद्यार्थी होना चाहिए। इसके लिए सरकारी स्वामित्व वाले परीक्षा केंद्रों का राष्ट्रीय नेटवर्क, क्षेत्रीय परीक्षा हब, ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों में कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग सुविधाएँ, दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए सुगम व्यवस्था, भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण परीक्षा सामग्री, एकीकृत राष्ट्रीय परीक्षा कैलेंडर, समयबद्ध परिणाम तथा स्वतंत्र परीक्षा लोकपाल एवं शिकायत निवारण तंत्र आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि महँगी कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए सरकारी मॉक टेस्ट, प्रश्न बैंक, कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग अभ्यास सुविधाएँ और मुक्त डिजिटल शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए तथा परीक्षा तंत्र से जुड़े हितों के टकराव को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जाना चाहिए।
महासंघ ने हाई पावर टास्क फोर्स से आग्रह किया है कि इन सुझावों पर व्यापक विचार करते हुए परीक्षा व्यवस्था में संरचनात्मक, संस्थागत और तकनीकी सुधारों को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाए। सभी प्रमुख सुधारों के लिए पायलट परीक्षण, स्वतंत्र मूल्यांकन और उसके बाद विस्तार की प्रक्रिया अपनाई जाए, ताकि भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली विश्वसनीयता, सुरक्षा, पारदर्शिता, समान अवसर और विद्यार्थी के सम्मान पर आधारित एक सुदृढ़ राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित हो सके।


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