April 13, 2026

Naval Times News

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स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवार सम्मेलन में आश्वासन के बाद भी मुख्यमंत्री के न आने पर, उत्तराखण्ड के सेनानी परिवार में आक्रोश

हरिद्वार 13 अप्रैल:  जालियांवाला बाग नर संहार की 107 वीं वर्षगांठ की स्मृति में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति द्वारा आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में भारत भर के विभिन्न प्रांतों से आए वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानियों और उत्तराधिकारियों ने बडी संख्या में शामिल हुए। 116 साल के स्वतंत्रता सेनानी स्वामी लेखराज और शतायु श्री आनंद सिंह बिष्ट को देख भाव विभोर हुए सेनानी उत्तराधिकारीयों ने उनकी चरण रज लेकर उनके प्रति अपना सम्मान और आभार व्यक्त किया।

सुबह पुल जटवाड़ा के निकट स्थित अमर शहीद जगदीश वत्स पार्क में बड़ी संख्या में स्वतंत्रता सेनानियों और उत्तराधिकारियों ने जगदीश वत्स की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित कर राष्ट्रगान के साथ ध्वजारोहण किया।

शहीद वत्स पार्क से आरम्भ हुई सेनानियों की सम्मान और शौर्य यात्रा को क्षेत्र के विधायक आदेश चौहान ने शुभ संकेत दिखा कर रवाना किया, पुल जटवाड़ा से ज्वालापुर कटहरा बाजार, रेलवे पुलिस चौकी ज्वालापुर, आर्य नगर चौक रानीपुर मोड़ होते हुए सम्मान यात्रा कार्यक्रम स्थल ऋषिकुल आयुर्वैदिक कॉलेज परिसर में पहुंची।

यात्रा में मार्ग जगह जगह पुष्प वर्षा, माल्यार्पण और सूक्ष्म जलपान से लोगों ने स्वागत किया। पुलिस एस्कॉर्ट और सराहनीय पुलिस सुरक्षा के बीच शहीदों के परिजनों को देखने लोग सड़कों पर उतरे।

सम्मेलन की शुरुआत शिवडेल स्कूल के छात्रों द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रगीत वंदे मातरम से की गई। कालेज आडिटोरियम में सर्वप्रथम सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेन्द्र रघुवंशी ने बड़े भाव पूर्ण ओजस्वी स्वर में उत्तराधिकारियों को गौरैया की भांति विलुप्त प्रजाति में होने की ओर अग्रसर स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों कह कर सम्बोधित किया,।

उन्होंने सेनानी उत्तराधिकारियों की समस्याओं और पीड़ाओं का जिक्र करते हुए कहा बडा दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ओर प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि सेनानियों के सपना का भारत बनायेंगे, वहीं दूसरी ओर सेनानी उत्तराधिकारियों को ऐसी उपेक्षा का सामना करना पड़ता है जो असहनीय है, उन्होंने कहा स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी परिवार कोई भिखमंगे नहीं हैं, सरकार ने हमें भिखमंगा मानलिया है, जिस दिन सेनानी उत्तराधिकारियों की हुंकार उठेगी सत्ताओं की नींव हिल जायेगी।

उन्होंने कहा स्वतंत्रता सेनानी पेंशन किसी वेतनभोगी का भाग नहीं है। सम्मान पेंशन है जिसे अनुचित रूप से बंद कर दिया गया। आक्रोश भरे शब्दों में जितेन्द्र रघुवंशी ने कहा कि कई बार उनकी घोषणा की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया किन्तु पिछले 5 साल में शहीद जगदीश वत्स सेवा सदन के लिए नगर निगम भूमि का चयन तक नहीं हो पाया।

सम्मेलन में रघुवंशी ने सेनानी सहयोगियों को भी यात्रा का अधिकार देने, अगली पीढ़ी को पेंशन लाभ देने की बात कही। मुख्यमंत्री द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद भी स्वतंत्रता सेनानी शहीद परिवार सम्मेलन में न आने पर उत्तराखण्ड राज्य के प्रत्येक जिले से आए पदाधिकारी आक्रोशित होकर अपने अपने घरों को वापस लौटे।

सम्मेलन का शुभारंभ कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानियों, संगठन के अध्यक्ष देशबन्धु, महासचिव जितेन्द्र रघुवंशी ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्वलित कर किया, सम्मेलन को संबोधित करते हुए हरिद्वार के विधायक और उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा मैं कि सेनानियों और उत्तराधिकारियों का हरिद्वार पधारने पर हार्दिक स्वागत करता हूं।

उन्होंने कहा कि आज जिस हवा में हम सांस ले रहे हैं, वह महान स्वतंत्रता सेनानियों की देन है, आप उन लोगों के वंशज हैं। मैं आप सभी के प्रति श्रद्धा भाव रखता हूं, भारत माता की स्वतंत्रता के लिए जिन्होंने बलिदान दिया मैं उन भारत माता के सपूतों को नमन करता हूं।

उन्होंने कहा कि रघुवंशी जी द्वारा सेनानी परिवारों की समस्याओं को मुख्यमंत्री तक अवश्य पहुंचाऊंगा और इतना ही नहीं आपके प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री के पास लेकर चलूंगा। नगर निगम बोर्ड से कोई दिक्कत नहीं आयेगी, यह मेरा वायदा है, सेनानी परिवारों के लिए काम कर कोई भी सरकार सम्मान महसूस करेगी।

छत्तीसगढ़ सरकार के नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्र ने कहा मै सबसे पहले आज जितने लोगों के बीच उपस्थित हूं ये सभी मेरे पारिवारिक सम्बंधी हैं, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी हमेशा नई चीजें लेकर सामने आते हैं और मुझे भरोसा है कि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के लिए भी उनके दिल में कुछ अनोखा चल रहा होगा, क्योंकि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों से बडी कोई संस्था नहीं हो सकती है। मुझे तो आज ऐसा महसूस होता है, जैसे 1947 के बाद केवल गांधी और नेहरू ने ही हमें आजादी दिलाई, हजारों के बलिदान से खडा है यह देश। सेनानी परिवार आज उपेक्षित हैं, जबकि वह केवल सम्मान कि अपेक्षा रखता है।

छत्तीसगढ़ में सम्मेलन करने की इच्छा व्यक्त करते हुए रघुवंशी जी से कार्यक्रम की तारीखें निर्धारित करने का आग्रह किया और उन्होंने मंच से सभी को छत्तीसगढ़ राज्य आने का निमंत्रण भी दिया।

कार्यक्रम को अनिर्वचनीय सम्बोधन के साथ शिवडेल स्कूल के संचालक स्वामी शरदपुरी ने स्वतंत्रता संग्राम में साधु सन्यासियों और नागा संतों के बलिदान को याद किया।

ऋषिकुल आयुर्वेदिक कालेज में स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के साथ अशोभनीय व्यवहार के लिए कालेज प्रबंधन की सेनानी परिवारों ने जम कर निंदा की और शेम शेम के नारे लगाए।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में रुड़की से कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने भी सेनानियों और उत्तराधिकारियों के प्रति सम्मान के भाव व्यक्त किए। सभी वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानियों को अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह और माल्यार्पण से सम्मानित किया गया।

मंच का कुशल संचालन साहित्यकार नरेश मोहन ने किया, शिवडेल के कलाकारों ने आपरेशन सिंदूर का भाव पूर्ण मंचन कर सभी को भाव विभोर कर दिया। संगठन के अध्यक्ष देशबन्धु ने आभार प्रकट किया।

कार्यक्रम की सफलता में आदित्य उपाध्याय, आदित्य गहलोत, अनुराग गौतम, प्रवेश कुमार, डॉ वेद प्रकाश आर्य, कैलाश चंद्र वैष्णव, कमल छाबड़ा का सराहनीय योगदान रहा।

कुमाऊं से पधारे श्री कमलेश पांडे, श्री नवीन चंद्र पांडे, श्री ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव सहित वहां की महिला मंडल की सदस्यायों ने कार्यक्रम की सहभागिता कर एकजुटता का संदेश दिया।

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