July 25, 2026

Naval Times News

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हरिद्वार: धनौरी पी.जी. कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक समापन

हरिद्वार: धनौरी पी.जी. कॉलेज, धनौरी में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ।

अतिथियों का स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं तुलसी का पौधा भेंट कर सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. तीर्थ प्रकाश, एसोसिएट प्रोफेसर, राजकीय महाविद्यालय, मंगलौर (हरिद्वार) ने भारतीय राजनीतिक चिंतन की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भीष्म पितामह भारतीय परंपरा के ऐसे महान राजनीतिक चिंतक थे, जिन्हें भारतीय संदर्भ में अरस्तू के समकक्ष माना जा सकता है।

उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, शासन व्यवस्था तथा राष्ट्र निर्माण में भारतीय चिंतन की प्रासंगिकता को विस्तार से समझाया।

इसके उपरांत डॉ. राखी पंचोला ने अपने व्याख्यान में कहा कि किसी भी राष्ट्र की नीति और चिंतन में भारतीयता का समावेश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति की वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान है, जो शांति, संतुलन, राष्ट्रीय हित तथा सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित है।

दूसरे वक्ता प्रो. दिनेश कुमार शर्मा, श्रीदेव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय, ऋषिकेश परिसर ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज के वैश्विक परिवेश में भारत के समक्ष आंतरिक एवं बाह्य दोनों प्रकार की चुनौतियाँ विद्यमान हैं। इन चुनौतियों का समाधान सुदृढ़ नेतृत्व, दूरदर्शी नीति तथा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने से ही संभव है।

उन्होंने यूरोप, अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया सहित विभिन्न देशों के उदाहरणों के माध्यम से समकालीन वैश्विक परिदृश्य का विश्लेषण प्रस्तुत किया तथा कहा कि भारत को अपनी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता एवं लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर वैश्विक स्तर पर सशक्त भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

इस अवसर पर एम.ए. के छात्र संजय ने कविता के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसे उपस्थित सभी जनों ने सराहा।

कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) विजय कुमार, मुख्य संरक्षक एवं सचिव श्री आदेश कुमार, सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव ने संगोष्ठी की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय गणतंत्र की 75 वर्षीय यात्रा की उपलब्धियों एवं चुनौतियों पर सार्थक अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है।

उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए संगोष्ठी को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

संगोष्ठी के सचिव डॉ. गौरव कुमार मिश्रा ने आयोजन की समस्त व्यवस्थाओं के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय मंच संचालन डॉ. कल्पना ने किया।

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